Haryana News: सरकार की ओर 5 लाख की तक निशुल्क ईलाज के लिए जारी किए आयुष्मान कार्ड धारकों का प्राइवेट अस्तपालो में ईलाज नहीं किया जा रहा है। रेवाड़ी में निजी अस्पतालों में मंगलवार को आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज नहीं किया इतना ही नहीं भुगतान की मांग को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने वर्क सस्पेंड भी रखा।
निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि सरकार 6-6 महीने तक अस्पतालों को आयुष्मान कार्ड धारकों के इलाज का पैसा नहीं देती है। उनका आरोप है कि इलाज खर्च की पूर्व-स्वीकृति के बाद भी कटौती की जाती है। बिना किसी कारण के बिल भी रिजेक्ट किए जाते हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि जून महीने से पेमेंट नहीं मिल रही है, जिसके चलते चिकित्सकों में भारी रोष है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कह जब तक मांगें पूरी नहीं होती तब तक आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं दिया जाएगा।
बता दे आयुष्मान योजना के तहत रेवाडी में 24 निजी अस्पतालों में इलाज होता है। इस अस्पतालो की सरकार की ओर से करीब 20 करोड़ के आसपास की राशि अटकी हुई है। बता दे हरियाणा सरकार ओर से पिछले चार माह से निजी अस्पतालों को मरीजों के इलाज का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
करीब 3.75 लाख कार्ड धारक हैं। फिलहाल जिन मरीजों का इलाज चल रहा है, उनकी सेवाएं जारी रहेंगी। नए मरीज भर्ती नहीं होंगे। निजी अस्पतालों के संचालक नाराज हैं और अब योजना के तहत मरीजों के इलाज से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन प्रधान डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि सरकार पर निजी अस्पतालों का करोड़ों रुपये बकाया है। इसके लिए सरकार से कई बार मांग की जा चुकी है पर अब तक बकाया भुगतान नहीं हो सका है।
परेशाान होकर आईएमए पात्रों का इलाज बंद करने का फैसला लिया गया है। क्योंकि पैसा ना मिलने के कारण अस्पताल संचालकों को काफी परेशानी हो रही है।
जानिए क्या है आईएमए की मुख्य मांगें
- स्वास्थ्य विभाग की आयुष्मान भारत योजना 2018 से अब तक रेट में बढ़ोतरी नहीं की गई है।
- चिरायु कार्ड व अन्य आयुष्मान कार्ड उच्च आय वर्ग के लिए जारी करे गए मगर, पैकेज में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।
- भुगतान में कटौती के समाधान के लिए कोई फोन नंबर नहीं हैं।
- हर दो दिन बाद इलाज बढ़ाने के लिए रिक्वेस्ट डालनी पड़ती हैं। इस व्यवथा को पांच दिन किया जाना चाहिए।
- वर्तमान परिस्थितियों में आयुष्मान कार्ड के तहत गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक तरीके से इलाज संभव नहीं रहा है।
- कर्मचारियों के इलाज की पात्रता के लिए अस्पतालों पर थोपी गई आयुष्मान भारत की अनिवार्यता समाप्त नहीं की गई।

















