हरियाणा: हरियाणा सरकार ने एक बार फिर एक बडा फैसला सुनाया है। सरकार ने प्रदेश नपा अधिकारियो को फिर से पावरफुल कर दिया है। वही जिला नगर आयुक्त (डीएमसी) की शक्तियों में कटौती की है।Haryana News: अध्यापको ने खून से लिखा ज्ञापन, रेवाडी विधायक को सौंपा
अब नगर परिषद और पालिकाएं अपने फंड (सरकारी ग्रांट को छोड़कर) में से 1 करोड़ तक के काम अपने स्तर पर करा सकेंगे। इसकी प्रशासनिक अनुमति के लिए फाइलें अब डीएमसी या फिर मुख्यालय से अप्रूवल नहीं लेनी होगी।
ये होगा फायदा: टेंडर रेट अप्रूवल के लिए भी डीएमसी या मुख्यालय की स्वीकृति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 1 करोड़ रुपए तक के टेंडर की रेट अप्रूवल अधीक्षक अभियंता (एसई) के माध्यम से ही मिल जाएगी।
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बता दें कि सरकार के शक्तियों के विभाजन के निर्णय से पार्षदों में जबरदस्त खुशी है। कई निकायों में जिला नगर आयुक्तों पर मनमर्जी चलाने, फाइलें रोककर बैठने के आरोप कुछ पार्षद लगाते आ रहे हैं। अब से समस्या नहीं आएगी।
ये फंड खर्च सकेंगे : नए आदेशों के तहत नगर परिषद और नगर पालिकाएं उसी बजट को खर्च कर सकेंगी जो कि उनके पास विभिन्न मदों से अर्जित हुआ है। इसमें प्रॉपर्टी टैक्स, किराया सहित अन्य शामिल है।
इसके अलावा केंद्र व राज्य के राजस्व विभाग से स्टांप ड्यूटी आदि की मिलने वाली राशि भी नगर परिषद हाउस के अधिकार क्षेत्र में आएगी। जबकि सरकार द्वारा जारी ग्रांट पर ये नियम लागू नहीं होंगे।

















