हरियाणा: हरियाणा सरकार ने ग्रुप डी कर्मचारियों को क्लर्क पद पर पदोन्नति देने की प्रक्रिया में सख्त शर्तें लागू कर दी हैं। नए आदेशों के तहत अब बिना पंजाबी और अंग्रेजी टाइपिंग टेस्ट पास किए किसी भी कर्मचारी को क्लर्क पद पर प्रमोशन नहीं दिया जाएगा। इतना ही नहीं, जो कर्मचारी निर्धारित समय में टाइपिंग टेस्ट पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें दोबारा उनके पुराने ग्रेड 4 पद पर वापस भेज दिया जाएगा।
जानिए क्यों लिया ये फैसला‘: यह फैसला सरकार ने कार्यालयों में कामकाज की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से लिया है और इसे तत्काल प्रभाव से सभी विभागों में लागू कर दिया गया है।
नए नियमों के अनुसार जो कर्मचारी ग्रुप डी से क्लर्क बनने के इच्छुक हैं, उन्हें प्रमोशन से कम से कम एक साल पहले सरकारी खर्चे पर अनिवार्य ट्रेनिंग लेनी होगी।
दफ्तरों में कार्यकुशलता बढ़ेगी: यह ट्रेनिंग टाइपिंग और कार्यालयी कार्यों से जुड़ी होगी, ताकि कर्मचारी क्लर्क पद की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकें। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से दफ्तरों में कार्यकुशलता बढ़ेगी और फाइलों के निपटारे में देरी कम होगी।इसके साथ ही सरकार ने उन कर्मचारियों को भी अंतिम मौका दिया है, जो पहले से क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं लेकिन अब तक पंजाबी या अंग्रेजी टाइपिंग टेस्ट पास नहीं कर पाए हैं।?
आखिरी मौका भी दिया जाएगा: बता दें कि ऐसे कर्मचारियों को 31 मार्च 2026 तक आखिरी मौका दिया गया है। यदि वे तय समय सीमा तक टाइपिंग टेस्ट पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें भी वापस ग्रेड 4 पद पर भेज दिया जाएगा। इस आदेश को लेकर डीसी, एसडीएम, बोर्ड और कॉर्पोरेशन के चेयरमैन को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान: सरकार ने टाइपिंग टेस्ट के आयोजन को लेकर भी विस्तृत व्यवस्था की है। सभी प्रशासनिक विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तीन सदस्यीय समिति का गठन करें। यह समिति साल में तीन से चार बार टाइपिंग टेस्ट का आयोजन करेगी, ताकि प्रमोशन चाहने वाले ग्रुप डी कर्मचारियों को पर्याप्त अवसर मिल सकें। इच्छुक कर्मचारियों को ऑफिस टाइम के बाद विभाग या कार्यालय स्तर पर, साथ ही महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान से टाइपिंग ट्रेनिंग की सुविधा भी दी जाएगी।
हालांकि कर्मचारी संगठनों ने इन नियमों पर आपत्ति जताई है और इसे कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बताया है। वहीं सरकार का कहना है कि यह कदम पूरी तरह प्रशासनिक सुधार के लिए उठाया गया है और इससे हजारों कर्मचारियों पर असर पड़ेगा, लेकिन लंबे समय में सरकारी कामकाज की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलेगा।

















