Haryana के किसानों के लिए एक नई पहल शुरू की गई है, जिसके तहत अब सूखे और कम पानी वाले क्षेत्रों में खजूर (डेट पाम) की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। हरियाणा सरकार ने इस योजना के तहत खजूर की “बारही” किस्म के पौधे मंगवाए हैं, जो आमतौर पर सऊदी अरब जैसे देशों में उगाए जाते हैं। इन पौधों को राजस्थान के जोधपुर स्थित टिश्यू कल्चर लैब में तैयार किया गया है और इन्हें हरियाणा के बागवानी विभाग द्वारा किसानों को वितरित किया जा रहा है।
किस तरह से होगा फायदा?
खजूर की खेती सूखे इलाकों में एक नई उम्मीद की किरण साबित हो सकती है। खासतौर पर हरियाणा के बीकानेर, हिसार, सिरसा, रेवाड़ी, महेन्द्रगढ़ जैसे जिले, जो राजस्थान से सटे हुए हैं, इन क्षेत्रों में खजूर की खेती शुरू हो चुकी है। हरियाणा सरकार किसानों को प्रति एकड़ 1.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी भी दे रही है, ताकि वे इस नई कृषि योजना को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
खजूर की खेती का महत्व
खजूर की खेती का खास फायदा यह है कि यह पेड़ कम पानी में भी उग सकता है, और इसकी फसल से किसानों को अच्छा लाभ मिल सकता है। खजूर के पेड़ कई सालों तक फल देते हैं, और इनकी फलन की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी होती है। इसके अलावा, खजूर का इस्तेमाल कई तरह से होता है, जैसे सूखे फल, रस, और यहां तक कि खजूर के पौधों के अन्य उत्पाद भी बाजार में बिकते हैं।
किसानों के लिए सरकार की योजनाएं
हरियाणा सरकार ने खजूर की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं बनाई हैं। इसमें सबसे बड़ी पहल सब्सिडी का प्रावधान है। सरकार प्रति एकड़ 1.5 लाख रुपये की सब्सिडी दे रही है, जो किसानों को इस खेती की शुरुआत में सहारा प्रदान करेगा। इसके साथ ही, किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी दी जाएगी, ताकि वे खजूर की खेती में सफल हो सकें।
भविष्य की दिशा
अगर यह योजना सफल होती है, तो यह न केवल किसानों की आय को बढ़ाएगा, बल्कि हरियाणा को खजूर उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान भी दिला सकता है। इसके अलावा, सूखे इलाकों में खेती को बढ़ावा मिलने से भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ेगी और किसानों को अतिरिक्त आय के स्रोत मिलेंगे।
अब देखना यह होगा कि इस योजना का लाभ और इसकी सफलता हरियाणा के किसानों के लिए कितनी बड़ी राहत बनती है।

















