Rewari AQI : दिवाली की रात रेवाड़ी शहर में आतिशबाजी देर रात तक जारी रहने से वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार प्रशासन ने केवल रात 8 से 10 बजे तक ग्रीन पटाखों की अनुमति दी थी, लेकिन शहर के विभिन्न इलाकों में रात 1 बजे तक आतिशबाजी होती रही।Rewari AQI
प्रदूषण हुआ जानलेवा: प्रतिबंध के बावजूद जमकर देर रात अतिशबाजी हुई। इतना ही कोर्ट के आदेश के बावजूद ग्रीन पटाखों की जगह जमकर दूसरे पटाखे चलाए गए। इतना ही सरेआम पटाखों की बिक्री भी जारी रही।
AQI का स्तर
- सोमवार रात 8 बजे AQI 284 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है।
- रात 11 बजे तक यह बढ़कर 305 हो गया, जो ‘गंभीर’ स्तर दर्शाता है।
- दिवाली के अगले दिन, मंगलवार सुबह 8 बजे AQI 377 तक पहुंच गया, और दोपहर 1 बजे यह आंकड़ा 395 पर रहा, जिसे ‘खतरनाक’ माना जाता है।
दिवाली की रात जब आकाश रंग–बिरंगे पटाखों से जगमगा रहा था, उसी समय हवा में ज़हर भी घुलने लगां सोमवार रात पूरे जोश से पटाखे फोड़े, नतीजा ये हुआ कि जहर हवा में घुलता ही चला गया।
इसके चलते हवा में धुंआ और धूलकणों की मात्रा कई गुना बढ़ गई, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन की शिकायतें आने लगीं।
धारूहेड़ा म्युनिसिपल कार्यालय के बाहर लगे प्रदूषण मापक उपकरणों ने दिवाली की रात वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को खतरनाक श्रेणी में दर्ज किया। देर रात तक AQI का स्तर 300 के पार पहुंच गया, जो “गंभीर” श्रेणी में आता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस स्तर पर हवा में सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10) की मात्रा स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होती है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए।
पर्यावरण विभाग और जिला प्रशासन की टीमों ने नियमों के उल्लंघन के मामलों पर निगरानी रखी, हालांकि कई इलाकों में लोगों ने रोक के बावजूद पटाखे जलाए। अधिकारियों का कहना है कि दिवाली के बाद अगले दो दिनों तक वायु गुणवत्ता में सुधार की संभावना कम है, क्योंकि हवा की गति भी सामान्य से कम बनी हुई है।

















