Coriander Price Fall: धनिया (Coriander) की खेती करने वाले किसानों के लिए इस बार की फसल निराशाजनक साबित हो रही है। फरीदाबाद जिले के सहूपुरा गांव के किसानों ने बड़ी उम्मीदों के साथ धनिया की खेती की थी, लेकिन अब वे आर्थिक नुकसान से जूझ रहे हैं। बाजार में धनिया की कीमतों में भारी गिरावट आने से किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
किसानों की मेहनत बेकार!
गांव के किसान बसंत का कहना है कि उन्होंने तीन किलो धनिया की फसल लगाई थी। Coriander (धनिया) की बुआई सितंबर से अप्रैल के बीच होती है और यह फसल जल्दी तैयार हो जाती है। महज सवा महीने से डेढ़ महीने के भीतर यह खेतों में लहलहाने लगती है। लेकिन इस बार बाजार में भाव बहुत गिर गया है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बसंत ने बताया कि एक बीघा खेत में करीब 5 से 6 किलो बीज की जरूरत होती है, जिसे वे बल्लभगढ़ से खरीदते हैं। जब फसल तैयार होती है तो एक बीघा में लगभग 2000 गड्डियां धनिया की होती हैं। अगर बाजार में प्रति सौ गड्डी का रेट 250 से 300 रुपये मिले तो किसानों को अच्छा मुनाफा होता है, लेकिन इस बार कीमतें 100 से 150 रुपये प्रति सौ गड्डी के बीच सिमट गई हैं। इससे किसानों को लाखों का नुकसान हो रहा है।
धनिया की खेती में मेहनत और देखभाल जरूरी
Coriander (धनिया) की खेती में कड़ी मेहनत लगती है। खेत की 4 से 5 बार जुताई करनी पड़ती है और सर्दियों में 2 से 3 बार सिंचाई करनी पड़ती है। इसके अलावा, धनिया की फसल को कीटों से बचाने के लिए कीटनाशकों का उपयोग भी करना पड़ता है। किसान “पांडा” नामक दवाई का छिड़काव करते हैं, जिसमें 25 लीटर पानी की टंकी में 80 से 100 ग्राम दवाई मिलाई जाती है। इसके बावजूद, बाजार में उचित दाम न मिलने से उनकी मेहनत बेकार जाती दिख रही है।
बाजार मंदी से किसान परेशान, भविष्य में बेहतर दाम की उम्मीद
मौजूदा समय में बाजार की मंदी से किसान चिंतित हैं। वे दिन-रात मेहनत करके धनिया की खेती कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान कीमतों पर उन्हें सिर्फ घाटा हो रहा है। किसानों का कहना है कि यदि बाजार में धनिया के भाव नहीं बढ़े, तो उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाएगी।
हालांकि, किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में धनिया के दाम सुधर सकते हैं। वे आशा कर रहे हैं कि बाजार में तेजी आएगी और उन्हें उनकी मेहनत का सही फल मिलेगा।

















