उर्जायुक्त आहार खिलाएं, बढ़ती सर्दी से पशुओं को बचाएं.
दिल्ली: सर्दी में पशुओं में कई बीमारियों जकड लेती है। बढती बीमारी के चलते विशेष देखभाल करने की जरूरत है। पशुओं को संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। सूखे चारे के साथ ही जई को हरे चारे के रूप में काम में लेना चाहिए।Dharuhera: फ्री हैल्थ चेैकअप शिविर 22 को
खेती के बाद पशुपालन ग्रामीण लोगों के अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम जरिया है। पशुपालन से ग्रामीण क्षेत्र में लोग अब अच्छी आय अर्जित कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे है। लेकिन पशुपालन के क्षेत्र में किसान और पशुपालकों की जरा सी लापरवाही उन्हें इस क्षेत्र में काफी घाटा देती है। जी हां हम बात कर रहे हैं पशुपालन में पशुओं की देख-रेख, पालन-पोषण और संरक्षण की।

ठंड का एहसास होने लगा है। दिन की धूप नरम पड़ने लगी है, वहीं रात का पारा गिर रहा है। आने वाले दिनों में देश के कई राज्यों में ठंड बढ़ सकती है। ऐसे में कृषि और पशु वैज्ञानिकों ने बढ़ती ठंड की आशंका व्यक्त करते हुए किसान और पशुपालकों के लिए कुछ जरूरी सावधानियों को बरतनें को कहा। जरा सी लापरवाही से पशुओं को ठंड से काफी नुकसान हो सकता है।
ऐसे में पशु वैज्ञानिकों ने गाय-भैसों को ठंड से बचाने के लिए एवं उनका खास ख्याल रखने के लिए कुछ घरेलू तरीके बताएं है। जिसकी मदद से पशुपालक अपने दुधारू मवेशियों की ठंड से बचाव कर सकते है। तो आइए ट्रैक्टरगुरु के इस लेख के माध्यम से उन घरेलू तरीकों के बारे में जानते है, जिनकी सहायता से हम अपने मवेशियों की ठंड से बचाव कर सकते है।
पशु चिकित्सक बताया, सर्दी से प्रभावित पशुओं में दूध देने की क्षमता करीब 10 फीसदी तक कम हो जाती है। दुग्ध उत्पादन सामान्य बनाए रखने के लिए सर्दी के लक्षण पशुओं में दिखाई देने पर तुरंत उपचार करवाना चाहिए।HTET परीक्षा परिणाम को लेकर आया नाया अपडेट, इस दिन जारी होगा परिणाम, फर्जी मेंल से रहे सावधान: वीपी यादव
सर्दी लगने के लक्षण
नाक से पानी बहना, गोबर की बजाय पतले दस्त होना, पेशाब में पीलापन आना, खाने में कमी होना तथा ज्यादातर समय बैठे रहना आदि।
पशुपालक करें उचित प्रबंध
पशुओं को संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। सूखे चारे के साथ ही जई को हरे चारे के रूप में काम में लेना चाहिए।
अधिक ऊर्जायुक्त आहर दें
गर्भधान के समय दुधारू पशु के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए। रात में अलाव तथा दिन में धूप दिलाएं। स्वच्छ और ताजा पानी पिलाना चाहिए तथा नमी से बचाव के लिए भी उपयुक्त प्रयास करने चाहिए। अधिक उर्जायुक्त आहार देने चाहिए।
थनैला रोग से करें बचाव
दुधारू पशुओं के थन अक्सर सर्दी की वजह से चटक जाते हैं या उन में सूजन आ जाती है। थनैला बीमारी होने की आशंका बन जाती है। इससे बचाव के लिए दूध निकालने के बाद कम से कम आधा घंटे तक पशुओं को जमीन पर नहीं बैठने देना चाहिए। थनों को पोटेशियम परमैग्नेट के घोल से धोना चाहिए।Rewari News: बार चुनाव का मैदान तैयार, चार पदों पर होगी कांटे की टक्कर
रोज गुड़ खिलाएं : बाड़े की रोज सफाई करें तथा सूखा रखें। पशुओं को जूट के बोरों से ढकें। रोज गुड़ खिलाएं। रात में रोशनदान बंद कर दें। अलाव दें।
















