सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा शपथ पत्र

On: March 22, 2026 1:07 PM
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सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा शपथ पत्र

राज्य के सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बार फिर गंभीर नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मामले में देरी बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में पहले मांगी गई रिपोर्ट अब तक पेश नहीं किए जाने पर मुख्य सचिव को शपथ पत्र के साथ विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में भवन और कक्षाएं बेहद खराब स्थिति में हैं। कई जगहों पर स्कूलों की छतें टूट चुकी हैं, दीवारों में दरारें आ गई हैं और बरसात के मौसम में पानी टपकने की समस्या आम हो गई है। ऐसी स्थिति में छात्रों और शिक्षकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई अभिभावकों ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा शपथ पत्रहाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी हैरानी जताई कि जुलाई महीने से अब तक केवल चार स्कूलों में ही मरम्मत का काम शुरू किया गया है। अदालत ने कहा कि यह संख्या बेहद कम है और इससे यह साफ होता है कि सरकार इस गंभीर समस्या को लेकर पर्याप्त तेजी से काम नहीं कर रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब मार्च में बजट लैप्स होने वाला है, तब भी सरकार केवल टेंडर जारी करने की प्रक्रिया में ही उलझी हुई है।

अदालत ने सरकार से पूछा कि आखिर इतने लंबे समय के बाद भी काम की गति इतनी धीमी क्यों है।

कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा का माहौल देना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि स्कूलों की इमारतें ही सुरक्षित नहीं होंगी, तो इससे बच्चों की जान को खतरा हो सकता है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मुख्य सचिव शपथ पत्र के माध्यम से यह बताएं कि अब तक कितने स्कूलों की मरम्मत का काम शुरू हुआ है, कितने स्कूलों के लिए टेंडर जारी किए गए हैं और बाकी स्कूलों में काम कब तक शुरू किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को इस पूरे मामले पर गंभीरता से काम करना चाहिए और जल्द से जल्द जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत सुनिश्चित करनी चाहिए।

शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि स्कूलों की मूलभूत सुविधाएं मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि स्कूलों में सुरक्षित भवन, साफ-सफाई और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं होंगे, तो शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में स्थित कई सरकारी स्कूलों की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मामले में कितनी तेजी से कदम उठाती है। यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मुद्दा आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकता है। फिलहाल अदालत ने सरकार से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है और अगली सुनवाई में इस मामले की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

P Chauhan

मै पीके चौहान पिछले 6 साल में पत्रकारिता में कार्यरत हूं। मेरे द्वारा राजनीति, क्राइम व मंनोरजन की खबरे अपडेट की जाती है।

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