HARYANA: भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के राष्ट्रीय प्रधान गुरु नाम सिंह चढूनी रविवार को रेवाड़ी पहुंचे, जहां उन्होंने किसान-मजदूर पंचायत को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र व राज्य सरकारों की नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों के बदले सरकार ने केवल 9000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया है, जो पूरी तरह से किसानों का अपमान है। उन्होंने मांग की कि यह मुआवजा बढ़ाकर कम से कम 35,000 रुपये प्रति एकड़ किया जाए, तभी किसानों को न्याय मिलेगा।
चढूनी ने वर्ष 2023 के बाजरे के भावांतर भुगतान योजना पर भी विस्तार से चर्चा करते हुए इसे किसानों के साथ छलावा करार दिया। उन्होंने खाद-बीज की कालाबाजारी को लेकर अधिकारियों और व्यापारियों की मिलीभगत पर भी खुलकर सवाल उठाए और सरकार से इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से यूनियन कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चलाने की जिम्मेदारी सौंपी।
अपने संबोधन में गुरु नाम सिंह चढूनी ने अमेरिका की उस नीति का भी कड़ा विरोध किया, जिसके तहत वह भारत पर अपनी कृषि व्यवस्था थोपना चाहता है। उन्होंने इसे भारतीय किसानों के लिए खतरनाक बताते हुए राष्ट्रव्यापी आंदोलन की जरूरत पर जोर दिया। पंचायत में अन्य कई अहम मुद्दों को उठाते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने समय रहते किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
ये रहे मौजूद: इस मौक पर सत्यवान नरवाल, मुन्नी बूढ़पुर, लोकेश बावल, जगदीश गुर्जर, शीशराम साहब, राजकुमार एस सी,अनूप यादव ममता यादव नीलम मुंद्रा कमलेश टहना कैलाश भोतवास, मनफूल चौधरी कृष्ण सैनी, वेद कुमार सुल्तानिया आदि कई किसान नेता मौजूद थे।

















