FD Scheme FD से होने वाली आय पर कितना टैक्स देना होगा? जानिए नए आयकर नियम

On: May 15, 2025 5:24 PM
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Income tax

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक सुरक्षित और लोकप्रिय निवेश विकल्प है, लेकिन इससे मिलने वाले ब्याज पर भी टैक्स लगता है। अगर आप FD में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानना ज़रूरी है कि इस पर किस तरह टैक्स लगता है और इसे बचाने के क्या तरीके हैं।

FD पर टैक्स क्यों लगता है?

फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाले ब्याज को आयकर अधिनियम के तहत आय के रूप में गिना जाता है। इसे आपकी कुल वार्षिक आय में जोड़ा जाता है और आपकी आयकर श्रेणी के आधार पर टैक्स लगाया जाता है। यह टैक्स दो तरह से काटा जा सकता है- बैंक द्वारा TDS काटकर या वार्षिक आयकर रिटर्न दाखिल करते समय।

FD पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स कैसे लगता है?

FD पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगाने की प्रक्रिया मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित है:

TDS कटौती: अगर FD से आपकी वार्षिक ब्याज आय ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक है, तो बैंक TDS काटता है। टीडीएस की दर 10% है, यानी अगर आपकी ब्याज आय ₹40,000 है, तो बैंक ₹4,000 टैक्स के तौर पर काटेगा और ₹36,000 आपके खाते में जमा हो जाएंगे। अगर आपने बैंक को पैन नंबर नहीं दिया है, तो टीडीएस की दर 20% तक बढ़ सकती है।

बिना टीडीएस के ब्याज पर टैक्स: अगर आपकी ब्याज आय टीडीएस कटौती सीमा से कम है, तो बैंक टीडीएस नहीं काटेगा। हालांकि, आपको अपनी पूरी ब्याज आय आयकर रिटर्न में दिखानी होगी और उसी के हिसाब से टैक्स देना होगा। अगर आपकी कुल आय न्यूनतम कर सीमा से कम है, तो आप फॉर्म 15G (60 साल से कम उम्र वालों के लिए) या 15H (वरिष्ठ नागरिकों के लिए) भरकर टीडीएस कटौती से बच सकते हैं।

एफडी पर टैक्स दर

एफडी पर टैक्स आपकी कुल आयकर स्लैब पर निर्भर करता है, 2.50 लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं है। 2,50,001 से 5 लाख रुपये पर 5% टैक्स लगता है। 5,00,001 से 10 लाख रुपये पर 20% और 10 लाख रुपये से ज़्यादा पर 30% टैक्स लगता है। अगर आपकी कुल आय ₹2,50,000 से ज़्यादा है और आपकी FD ब्याज आय इस सीमा के अंदर आती है, तो आपको टैक्स देना होगा।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष छूट

वरिष्ठ नागरिकों को ₹50,000 तक की ब्याज आय पर कोई TDS नहीं देना पड़ता है। हालांकि, अगर उनकी कुल आय ₹2,50,000 से ज़्यादा है, तो उन्हें आयकर स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा। सेक्शन 80TTB के तहत वरिष्ठ नागरिकों को FD, बचत खातों और पोस्ट ऑफिस जमा पर मिलने वाले ब्याज पर ₹50,000 तक की छूट मिलती है।

FD आय का आकलन कैसे करें?

कर देयता को समझने के लिए ब्याज आय का सही आकलन करना ज़रूरी है। अगर आपने 7% सालाना ब्याज दर पर ₹5,00,000 की FD की है, तो आपको सालाना ₹35,000 की ब्याज आय होगी। अगर आपकी कुल आय ₹2,50,000 से कम है, तो इस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। अगर आपकी आय ₹5,00,000 से ज़्यादा है, तो इस ब्याज पर 5% से 20% की दर से टैक्स लगेगा।

TDS और आयकर रिटर्न (ITR)
अगर बैंक TDS काटता है, तो आपको अपना आयकर रिटर्न दाखिल करते समय इसका उल्लेख करना होगा। अगर आपकी कुल आय कर योग्य सीमा के अंतर्गत नहीं आती है, लेकिन बैंक ने TDS काट लिया है, तो आप इसे रिफंड के तौर पर पा सकते हैं। अगर आपकी आय ज़्यादा है और काटा गया टैक्स TDS से कम है, तो आपको रिटर्न दाखिल करते समय अतिरिक्त टैक्स देना होगा।

FD पर टैक्स सेविंग टिप्स
अगर आपकी कुल आय कर योग्य सीमा से कम है, तो आप यह फ़ॉर्म भरकर TDS से बच सकते हैं। 5 साल की लॉक-इन अवधि वाली FD पर धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है। वरिष्ठ नागरिकों को ₹50,000 तक की ब्याज आय पर विशेष छूट मिलती है। परिवार के सदस्यों के नाम पर FD करके टैक्स देनदारी को विभाजित किया जा सकता है। ELSS म्यूचुअल फंड, PPF और NPS जैसी टैक्स-सेविंग योजनाओं का लाभ उठाएँ।

 

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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