देशभर में 4 मार्च यानि बुधवार को धुलंडी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। भाई-चारे, सांप्रदायिक सौहार्द का त्योहार है। लोग जाति-धर्म, ऊंच-नींच के भेदभाव को भुलाकर एक-दूसरे को गुलाल अबीर लगाकर, गले मिलकर इस त्योहार को मनाते हैं। इस बार होली के दूसरे दिन की बजाय तीसरे दिन भारत में होली का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया गया।
वर्षो बाद हुए ऐसा: लोगों का कहना है अक्सर होली के दूसरे दिन ही धुलंडी पर्व मनाया जाता है है लेकिन इस बार होली 2 मार्च को मनाई जबकि धुलंडी 4 मार्च को मनाई गई। हालांकि इसबार लोग बार बार यही कह रहे थे आजकल तो त्योंहारों केा ग्रहण लग गया है।
औद्योगिक नगरी धारूहेडा तथा आस पास के गांवों में बुधवार को होली का त्योहार पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहर की गलियां, कॉलोनियां और सोसायटियों रंग लगाते हुए होली है होली के नारे गुंजते सुनाई दिए। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी एक-दूसरे को गुलाल लगाते और रंग उड़ाते दिखाई दिए। कई जगह ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर लोगों ने जमकर नृत्य किया तथा गले मिलकर बधाईयां दी।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश: जागरूकता के चलते जल सरंक्षण को लेकर काफी जागरूक हो रहे है।शांति से एक दूसरे के घर जाकर गुलाल लगाकर भाईचारे का संदेश देते हुए लोगो दिखाइ दिए। इस बार धारूहेड़ा में होली केवल रंगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश मिला।
गुलाल लगाकर भाईचारे का संदेश दिया: शांति से एक दूसरे के घर जाकर गुलाल लगाकर भाईचारे का संदेश देते हुए लोगो दिखाइ दिए। इस बार धारूहेड़ा में होली केवल रंगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश मिला। बड़ी संख्या में लोगों ने पानी का उपयोग किए बिना सूखी होली मनाई।

टोलियां कॉलोनियों में घूमती रही: बता दे सुबह से युवाओं की टोलियों कालोनियों मे घूमती रही। युवा मुख्य बाजार, बस स्टैंड क्षेत्र और विभिन्न आवासीय कॉलोनियों में युवाओं की टोलियां डीजे की धुन पर नाचती-गाती हुई गलियों में घूमती रहीं।
चंद्र ग्रहण से बिगाडा खेल’ बता दे कि इस वर्ष चंद्र ग्रहण के कारण अधिकतर समाजों में बच्चों की पारंपरिक ‘ढूंढ’ रस्म मंगलवार को नहीं की गई। यह परंपरा बुधवार को निभाई जाएगी। कई मोहल्लों में बुधवार को भी रंगोत्सव की रौनक बनी रहने की उम्मीद है।कई स्थानों पर होली मिलन समारोह आयोजित किए गए, जहां लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं और ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर नृत्य किया।

















