Dharuhera News: गांव नंदरामपुर बास में 2 अप्रैल को बाबा बिशन दास जी महाराज के वार्षिक मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले की तैयारियों को लेकर मेला कमेटी की प्रधान की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें इस बार अंतिम कामडा 51 हजार का रखा गया। आयोजन समिति के अनुसार मेले में लगने वाली विसारत की दुकानों की बुकिंग 15 मार्च सुबह 8:00 बजे बाबा बिशन दास मंदिर प्रांगण में की जाएगी।
यहां पर करवा सकते है दुकानें बुकिंग: दुकानों की बुकिंग के लिए संजय सैनी (9812051152), अरविंद यादव (9813385280), रिंकू गुप्ता (9050748640) तथा विपिन यादव (8199950372) से संपर्क किया जा सकता है। इसके बाद 16 मार्च 2026 से 1 अप्रैल 2026 तक दुकानों की बुकिंग नरेंद्र अग्रवाल (मो. 9416236550) के पास अग्रवाल क्लॉथ हाउस, मेन बाजार नंदरामपुर बास पर की जाएगी।
मेले के दौरान खेल प्रेमियों के लिए दंगल प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें विजेता पहलवान के लिए 51 हजार रुपये का आकर्षक इनाम रखा गया है। मेंले में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
बाबा बिशनदास का मेला कब-कब भरता है, जानिए क्या है लोगों की आस्था
रेवाड़ी जिले के गांव नंदरामपुर बास में स्थित बाबा बिशनदास जी महाराज का मंदिर क्षेत्र के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है। यहां हर साल में दो बार मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।इस अवसर पर मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, भंडारे और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
मेले के दौरान श्रद्धालु बाबा बिशनदास जी के दर्शन कर मनोकामनाएं मांगते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां जरूर पूरी होती है। इसी आस्था के कारण हर साल मेले में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। मेले में झूले, खान-पान और विभिन्न प्रकार की दुकानों के साथ ग्रामीण संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है, जिससे यह आयोजन क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम बन जाता है।
दंगल प्रतियोगिता का आयोजित’ बता दे कि मेले की खास बात यह भी है कि यहां पारंपरिक दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें कई नामी पहलवान भाग लेते हैं। दंगल देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ग्रामीणों के सहयोग और बाबा बिशनदास चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रयासों से यह मेला हर वर्ष उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित किया जाता है, जो क्षेत्र की आस्था और सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखने का काम करता है।

















