फरीदाबाद महानगर क्षेत्र में गांवों और शहर के बीच आवागमन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से City Bus सेवा शुरू की गई थी। इस सेवा का मकसद यह था कि दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोग आसानी से शहर तक पहुंच सकें और उन्हें निजी वाहनों या महंगे साधनों पर निर्भर न रहना पड़े। इसके लिए फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) की ओर से करीब 50 सिटी बसों का संचालन किया जा रहा है। हालांकि, हाल के दिनों में परिचालकों की कमी के कारण यह सेवा पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही है। परिणामस्वरूप रोजाना 15 से 20 बसें डिपो में ही खड़ी रह जाती हैं, जिससे यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि सिटी बस सेवा शुरू होने के बाद उन्हें काफी राहत मिली थी, लेकिन अब बसों की संख्या कम होने से स्थिति फिर से मुश्किल होती जा रही है। सुबह और शाम के समय जब लोगों को काम, पढ़ाई या अन्य जरूरी कार्यों के लिए यात्रा करनी होती है, तब बसों की कमी सबसे ज्यादा महसूस होती है। कई बार यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और कुछ लोग मजबूरी में ऑटो या अन्य निजी साधनों का सहारा लेते हैं, जिससे उनका खर्च भी बढ़ जाता है।
रूटों पर घट रही बसों की संख्या ?
जानकारी के अनुसार प्रत्येक रूट पर आमतौर पर तीन से चार बसों का संचालन किया जाता है ताकि यात्रियों को ज्यादा इंतजार न करना पड़े। लेकिन परिचालकों की कमी के कारण हर रूट से एक या दो बसों को हटाना पड़ रहा है। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है। कई रूटों पर बसों के बीच का अंतराल बढ़ गया है, जिससे लोगों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी 903, 904 और 909 रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को हो रही है। इन रूटों पर यात्रियों की संख्या अन्य रूटों की तुलना में अधिक होती है। इनमें बड़ी संख्या में छात्र, नौकरीपेशा लोग और दैनिक मजदूरी करने वाले लोग शामिल हैं। बसों की संख्या कम होने के कारण कई बार बसें पहले से ही भरी हुई पहुंचती हैं और यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है। कई बार तो बस में जगह न मिलने के कारण लोगों को अगली बस का इंतजार करना पड़ता है।
मेंटेनेंस और स्टाफ की कमी भी बड़ी वजह ?
उच्च अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में एक दिन में कुल 23 बसें डिपो में खड़ी रहीं। इनमें से पांच बसें केवल परिचालकों की कमी के कारण रूट पर नहीं भेजी जा सकीं, जबकि 18 बसें मेंटेनेंस के कारण बंद थीं। इससे साफ है कि बसों की तकनीकी देखभाल और स्टाफ की उपलब्धता दोनों ही इस समस्या की मुख्य वजह बन रहे हैं।परिवहन व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बसों के नियमित मेंटेनेंस की वजह से कुछ बसों को अस्थायी रूप से सेवा से हटाना पड़ता है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से समझौता न हो। हालांकि, परिचालकों की कमी को दूर करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। यदि जल्द ही नए परिचालकों की नियुक्ति की जाती है तो बसों का संचालन पहले की तरह सुचारू रूप से किया जा सकेगा। दूसरी ओर यात्रियों का मानना है कि सिटी बस सेवा शहर और गांव के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुकी है, इसलिए इसकी व्यवस्था मजबूत होना बेहद जरूरी है। कई लोगों का कहना है कि यदि बसें नियमित रूप से और पर्याप्त संख्या में चलें तो निजी वाहनों का इस्तेमाल भी कम होगा और ट्रैफिक की समस्या में भी कमी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था तभी सफल होती है जब वह नियमित, सस्ती और भरोसेमंद हो। यदि बसें समय पर न चलें या उनकी संख्या कम हो जाए तो लोग धीरे-धीरे इस सेवा से दूर होने लगते हैं। इसलिए जरूरी है कि प्रशासन इस समस्या का जल्द समाधान करे।
फिलहाल यात्रियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में परिचालकों की कमी दूर होगी और मेंटेनेंस की समस्या भी कम होगी। ऐसा होने पर सिटी बस सेवा फिर से पूरी क्षमता के साथ चलेगी और गांव से शहर तक का सफर पहले की तरह आसान हो सकेगा।
















