शिवरात्रि: इस बार सावन के महीने में शनि प्रदोष व्रत 15 जुलाई को पड़ रहा है। इसी दिन शिवरात्रि भी है जिस वजह से इसका महत्व और कई गुना बढ़ जाता है।
सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु कावड़ लाने के लिए हरिद्वार भी गए हुए हैं। अबकी बार सावन के महीने में शनि प्रदोष व्रत 15 जुलाई को पड़ रहा है। ऐसे में इस शनिवार को अलगे की महत्त्व हो गया हे।Haryana: अग्निवीर भर्ती रैली के लिए एडमिट कार्ड हुए जारी, यहां देखिए भर्ती वाईज शेड्यूल
हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को त्रयोदशी मनाते हैं। प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी के व्रत को प्रदोष व्रत कहा जाता है। सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आने से पहले का समय प्रदोष काल कहलाता है।

प्रदोष व्रत में भगवान शिव कि पूजा की जाती है. माना जाता है कि भगवान शिव प्रदोष के समय कैलाश पर्वत स्थित अपने रजत भवन में नृत्य करते हैं. इस दिन शिव जी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है.
यं तो भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए सावन का महीना किसी भी पर्व से कम नहीं होता। सावन के महीने की शुरुआत हो चुकी है। लेनिक इस बार सावन 58 दिन है। 19 साल बाद ये भी एक नया इतिहास है।हरियाणा में खत्म हुई नगर परिषद- पालिका चेयरमैन की पावर, आंदोलन की तैयारी
कब है शनि प्रदोष व्रत
शनि प्रदोष व्रत शनिवार को है। सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ और शनि देव की आराधना करें। संतान प्राप्ति के लिए इस दिन अभिषेक व शिवपूजन करवाने से विशेष लाभ मिलता है।
पुत्र की उन्नति के लिए प्रदोष व्रत शुरू करने के लिए यह दिन काफी अच्छा है। इस व्रत में माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ की पूजा करने का विशेष महत्व है।
शनि प्रदोष व्रत पर शनिदेव की पूजा अर्चना भी की जाती है। करीब 19 सालों के बाद अधिकमास में यह संयोग बन रहा है। सावन अधिकमास में एकादशी व्रत पड़ रहा है। इसीलिए इस दिन सभी लोग भगवान भोलेनाथ के साथ- साथ शनिदेव का भी आशीर्वाद ले पाएंगे।
प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त
शनि प्रदोष पूजा मुहूर्त- शाम 07 बजकर 23 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 24 मिनट तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त – शाम 07 बजकर 23 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 39 तक
शनि प्रदोष व्रत की पूजन विधि्
प्रदोष व्रत वाले दिन पूजा के लिए प्रदोष काल यानी शाम का समय शुभ माना जाता है। इसके लिए सूर्यास्त से एक घंटे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा-पाठी की पूरी तैयारी कर लेंं।Haryana Flood News: हरियाणा में बाढ़ का कहर, 900 गांवो में बिगडी हालत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
अब शिवलिंग पर श्वेत चंदन लगाकर बेलपत्र, मदार, पुष्प, भांग चढ़ाए और विधिपूर्वक पूजन और आरती करें।
स्नान के बाद संध्या के समय शुभ मुहूर्त में पूजा आरंभ करें। गाय के दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें।

















