संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। इस प्रतिष्ठित परीक्षा में राजस्थान के कोटा निवासी अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों का चयन विभिन्न केंद्रीय सेवाओं के लिए किया गया है। चयनित अभ्यर्थी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) समेत अन्य केंद्रीय सेवाओं में नियुक्त किए जाएंगे। उम्मीदवार अपना परिणाम आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in और upsconline.nic.in पर जाकर देख सकते हैं, जहां सफल अभ्यर्थियों के नाम और उनकी रैंक की पूरी सूची जारी की गई है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है।
इस परीक्षा का पहला चरण यानी प्रारंभिक परीक्षा 25 मई 2025 को आयोजित किया गया था। इसके बाद मुख्य परीक्षा 22 अगस्त से 31 अगस्त 2025 के बीच आयोजित की गई। मुख्य परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को पर्सनैलिटी टेस्ट या इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। इंटरव्यू की प्रक्रिया 27 फरवरी 2026 तक चली, जिसके बाद आयोग ने अंतिम परिणाम घोषित कर दिया।
इस साल UPSC से चयनित अधिकारियों के कैडर आवंटन के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है।
केंद्र सरकार ने 2017 से लागू ‘जोन सिस्टम’ को समाप्त कर दिया है और इसके स्थान पर ‘कैडर एलोकेशन पॉलिसी 2026’ लागू की गई है। नई नीति के तहत अधिकारियों को कैडर देने के लिए अब ‘साइकिल सिस्टम’ अपनाया जाएगा। यह नई व्यवस्था भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFoS) के चयनित उम्मीदवारों पर लागू होगी।
पहले की व्यवस्था में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर कुल 25 कैडर बनाए गए थे, जिन्हें भौगोलिक आधार पर पांच जोन—नॉर्थ, वेस्ट, साउथ, सेंट्रल और ईस्ट—में बांटा गया था। मुख्य परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों को DAF-II फॉर्म भरना होता था, जिसमें वे पहले जोन और फिर राज्य की प्राथमिकता बताते थे। जिस राज्य में अधिकारी की नियुक्ति होती थी, उसी राज्य को उसका स्थायी कैडर माना जाता था।
नई कैडर आवंटन नीति के तहत अब सभी 25 कैडरों को वर्णानुक्रम यानी अल्फाबेटिकल क्रम (A, B, C…Z) में व्यवस्थित कर चार अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप-I में AGMUT (दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश), आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। ग्रुप-II में गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश को रखा गया है। ग्रुप-III में महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु शामिल हैं, जबकि ग्रुप-IV में तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब कैडर आवंटन की प्रक्रिया पहले से अलग होगी।
पहले किसी जोन के भीतर ही राज्यों के विकल्प मिलते थे, लेकिन अब अल्फाबेटिकल ग्रुपिंग के कारण अलग-अलग राज्यों के विकल्प एक ही समूह में आ सकते हैं। इससे उम्मीदवारों को कैडर मिलने की प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिलेगा और नियुक्ति की संभावनाएं पहले की तुलना में अलग तरीके से तय होंगी।
















