दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य दिल्ली को साफ, सुथरा और आधुनिक शहर बनाना है। इसी उद्देश्य से आने वाले तीन वर्षों में राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस अवधि के भीतर दिल्ली में चलने वाली सभी सरकारी बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों में बदला जाएगा। इससे डीजल और पेट्रोल से चलने वाली बसों पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
पूंजीगत खर्च बढ़ाने का बड़ा फैसला: दिल्ली के विकास और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सरकार ने पूंजीगत खर्च बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। राजधानी में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पर्यावरण सुधार की दिशा में कदम उठाते हुए सरकार ने अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर को लगभग दोगुना कर दिया है। अब दिल्ली के विकास कार्यों पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि का उपयोग सड़कों के सुधार, सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विकास परियोजनाओं पर किया जाएगा।
11 हजार इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी: मुख्यमंत्री के अनुसार, इस योजना के तहत दिल्ली में कुल 11 हजार इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इन बसों की तैनाती को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। इलेक्ट्रिक बसें न केवल पर्यावरण के अनुकूल होंगी, बल्कि यात्रियों के लिए भी अधिक आरामदायक साबित होंगी। इनमें किसी तरह का धुआं नहीं निकलेगा, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और राजधानी के प्रदूषण स्तर को कम करने में मदद मिलेगी।
ईंधन की बचत : सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से ईंधन की बचत भी होगी, जिससे लंबे समय में आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही प्रदूषण में कमी आने से बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित लोगों की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने से निजी वाहनों की संख्या में भी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

















