Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या क्या है महत्व? जानिए पूजा का सही तरीका

On: March 21, 2026 7:34 PM
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मौनी अमावस्या

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या लोक-आस्था और सनातन परंपरा का अत्यंत पावन पर्व माना जाता है। इसे माघ अमावस्या भी कहा जाता है और इसका विशेष महत्व स्नान, दान, जप और संयम से जुड़ा हुआ है।:

मौनी अमावस्या हर वर्ष माघ महीने की अमावस्या तिथि को आती है। यह तिथि सामान्यतः मकर संक्रांति के बाद पड़ती है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों मकर राशि में स्थित होते हैं, इसलिए इसे आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत शुभ माना गया है।

मौनी अमावस्या की सबसे बड़ी विशेषता पवित्र नदियों में स्नान का महत्व है। गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है। प्रयागराज जैसे तीर्थ स्थलों पर इस दिन विशेष स्नान का आयोजन होता है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।Mauni Amavasya 2026

 

सनातन धर्म में हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रत्येक माह के तिथि पर्व का अपना विशेष महत्व है. ऐसे में माघ के महीने में पड़ने वाली अमावस्या मौनी अमावस्या के रूप में जानी जाती है. यह दिन मौन रहकर स्नान और दान करने के लिए महत्वपूर्ण तो होता है, साथ ही पितरों के निमित्त इस दिन श्रद्धा व पूजन करना विशेष फलदाई होता है. ब्राह्मण भोज करवाने के साथ पितरों के नाम पर दान करना सबसे अधिक उत्तम बताया गया है.

Mauni Amavasya 2026  पूजा की विधि

  • मौनी अमावस्या पर तर्पण प्रातः काल करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है, इसलिए सूर्योदय के बाद गंगा स्नान या शुद्ध जल से स्नान अवश्य करें.
  • स्नान के बाद शरीर और मन को शुद्ध रखते हुए स्वच्छ और शांत स्थान का चयन करें, ताकि तर्पण विधि एकाग्रता से हो सके.
  • तर्पण के लिए कुश, तिल और जल का प्रयोग करें, जिन्हें शास्त्रों में पवित्र और पितरों को प्रिय बताया गया है.
  • तर्पण करते समय अपने पितरों का नाम लेकर या स्मरण करते हुए श्रद्धा और आभार भाव से जल अर्पित करें.
  • शास्त्रों के अनुसार इस दौरान मौन रहना उत्तम माना गया है, जिससे मन स्थिर और भाव शुद्ध बने रहें.
  • पूजा में दीपक और धूप जलाकर सरल मंत्रों के साथ पितृ देवताओं का आह्वान करें.
  • तर्पण के समय सात्विक और स्वच्छ वस्त्र धारण करना आवश्यक माना गया है.
  • पूरी विधि के दौरान क्रोध, जल्दबाजी और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए.Mauni Amavasya 2026

इस पर्व का नाम “मौनी” इसलिए पड़ा क्योंकि इस दिन मौन व्रत रखने की परंपरा है। मान्यता है कि मौन रखकर ईश्वर का स्मरण करने से मन की शुद्धि होती है और आत्मिक शांति मिलती है। कई साधु-संत और श्रद्धालु पूरे दिन मौन का पालन करते हैं।

मौनी अमावस्या पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। अन्न, वस्त्र, कंबल, तिल, गुड़ और धन का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है। पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म भी इस दिन किए जाते हैं।

मौन धारण करने से मिलते ये लाभ: ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर मनु ऋषि का जन्म हुआ था. मनु से ही मौनी शब्द की उत्पत्ति हुई है. मौनी अमावस्या के व्रत में मौन धारण करने का विशेष महत्व बताया गया है.

Harsh

हर्ष चौहान पिछले तीन साल से पत्रकारिता में कार्यरत हूं। इस साइट के माध्यम से अपराध, मनोरंजन, राजनीति व देश विदेश की खबरे मेरे द्वारा प्रकाशित की जाती है। मै बतौर औथर कार्यरत हूं

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