Cow Milk Record: हरियाणा के कैथल जिले से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है. जहां एक देशी नस्ल की गाय ने एक दिन में 17 लीटर दूध देकर नया रिकॉर्ड बनाया है. यह उपलब्धि कैथल जिले के खरक पांडवा गांव के किसान सुनील सहारण की मेहनत और समर्पण का परिणाम है. जिन्होंने इस गाय की देखभाल परिवार के सदस्य की तरह की.Cow Milk Record
यशोदा एक खास देशी नस्ल की गाय
सुनील सहारण की गाय ‘यशोदा’ को उन्होंने छह महीने की उम्र से ही विशेष देखभाल के साथ पाला. उन्होंने बताया कि यशोदा को उत्तम पोषण, साफ-सुथरा वातावरण और पर्याप्त समय दिया गया. यही वजह है कि यशोदा ने आज दुग्ध उत्पादन में स्थानीय स्तर पर नया कीर्तिमान स्थापित किया है.
खेती के साथ पशुपाल
सुनील सहारण न सिर्फ खेती में बल्कि पशुपालन में भी गहरी रुचि रखते हैं. उनका मानना है कि खेती के साथ-साथ पशुपालन करने से किसान अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं. वे हर साल उन्नत नस्ल की गाय और भैंसों की बिक्री से लाखों रुपये की कमाई करते हैं.Cow Milk Record
यशोदा की देखभाल बनी सफलता की कुंजी
सुनील ने बताया कि यशोदा की रोजाना की दिनचर्या, आहार, साफ-सफाई और स्वास्थ्य पर खास ध्यान दिया गया. उन्होंने यशोदा को कभी मशीन से नहीं दुहा, बल्कि पारंपरिक तरीके से पालन कर उसकी स्वाभाविक क्षमताओं को बनाए रखा. यह संपूर्ण देखभाल ही यशोदा की 17 लीटर प्रतिदिन दूध देने की क्षमता का आधार बनी.
हरियाणा में घट रही है पशु संख्या
सुनील सहारण ने बताया कि सरकारी पशु गणना के अनुसार हरियाणा में गाय और भैंसों की संख्या में गिरावट देखी गई है. लेकिन इसके बावजूद कुछ किसान उन्नत नस्लों का पालन कर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि कर रहे हैं. यह न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल दे रहा है. बल्कि पोषण सुरक्षा में भी योगदान दे रहा है.
सरकार का सहयोग भी बना सहारा
हरियाणा सरकार भी उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है. सुनील सहारण जैसे किसान इन योजनाओं का लाभ लेकर उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसान सरकारी सहायता और उचित देखभाल के साथ काम करें, तो पशुपालन एक लाभदायक व्यवसाय बन सकता है.
पशुपालन गांवों के लिए बड़ा अवसर
सुनील सहारण ने अन्य किसानों को भी सुझाव दिया कि वे खेती के साथ-साथ पशुपालन को अपनाएं. इससे न केवल अतिरिक्त आय होगी. बल्कि गांवों में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी. यशोदा गाय की सफलता ने साबित कर दिया है कि देशी नस्लें भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं, बशर्ते उन्हें सही देखभाल मिले.

















