Highlight Paracetamol use
- सिर दर्द, बुखार और बॉडी पेन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवा
- लगातार सेवन से लिवर, किडनी और पाचन तंत्र पर बढ़ता है दबाव
- प्रेगनेंसी में बार-बार सेवन से बच्चे के दिमागी विकास पर पड़ सकता है असर
- गलत कॉम्बिनेशन से ओवरडोज का खतरा और भी ज्यादा
नई दिल्ली: भारत में पैरासिटामोल सबसे आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में से एक है। हल्का बुखार, सिरदर्द या बदन दर्द होने पर लोग अक्सर बिना डॉक्टर की सलाह लिए इसका सेवन कर लेते हैं। लेकिन हालिया शोधों ने इस दवा के बार-बार और लापरवाही से इस्तेमाल को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर यह लिवर और किडनी के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।Paracetamol
बार-बार सेवन से बढ़ता है खतरा: मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार पैरासिटामोल शरीर में जाकर लिवर पर दबाव डालती है। लंबे समय तक इसका बार-बार सेवन करने से लिवर डैमेज या लिवर फेलियर जैसी स्थिति तक आ सकती है। वहीं प्रेगनेंसी के दौरान इसका बार-बार इस्तेमाल बच्चों में न्यूरोडेवलपमेंट संबंधी विकार का खतरा बढ़ा सकता है। रिसर्च में पाया गया है कि इसका असर बच्चे के दिमागी विकास पर पड़ सकता है जिससे भविष्य में ऑटिज्म या ध्यान की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
ओवरडोज का खतरा: पैरासिटामोल की सुरक्षित खुराक बच्चों के लिए उनकी उम्र और वजन के अनुसार तय की जाती है। वहीं बड़ों के लिए एक बार में 500 एमजी से 650 एमजी तक ही लेने की सलाह दी जाती है और अगली खुराक कम से कम 4 से 6 घंटे बाद लेनी चाहिए। शराब, पेन किलर्स या सर्दी-जुकाम की दवाओं के साथ पैरासिटामोल लेने से भी ओवरडोज का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि इनमें भी पैरासिटामोल मौजूद हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पैरासिटामोल को हर दर्द या हल्की तकलीफ का समाधान मानना गलत है। डॉक्टर की सलाह के बिना बार-बार इसका सेवन लिवर और किडनी पर खतरनाक असर डाल सकता है। छोटी परेशानियों में दवा लेने की बजाय पर्याप्त आराम, पानी और सही खानपान से भी राहत मिल सकती है।















