Atal Tunnel: ये है हिमाचल की सबसे लंबी सुरंग, जानिए क्यों पडी इसकी जरूरत, कितनी गति से दोड सकते है इसमें वाहन

On: March 21, 2026 11:25 PM
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ये है हिमाचल की सबसे लंबी सुरंग, जानिए क्यों पडी इसकी जरूरत, कितनी गति से दोड सकते है इसमें वाहन

Atal Tunnel: हिमाचल प्रदेश में स्थित अटल सुरंग (Atal Tunnel) भारत की रणनीतिक दृष्टि से एक बेहद अहम परियोजना है। इस सुरंग का निर्माण रोहतांग दर्रे के नीचे किया गया है और यह कुल 9.02 किलोमीटर लंबी है। यह सुरंग मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से पूरे साल जोड़कर रखती है, जो पहले भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में पूरी तरह कट जाती थी।Atal Tunnel

कब बनी Atal Tunnel अटल सुरंग?
अटल सुरंग का उद्घाटन 3 अक्टूबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इसका निर्माण कार्य 2010 में शुरू हुआ था और इसे बनाने में लगभग 10 साल लगे। इस सुरंग का नाम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में रखा गया, जिन्होंने इस परियोजना को हरी झंडी दी थी।Atal Tunnel

क्या खास है इस सुरंग में?
दुनिया की सबसे लंबी हाईवे टनल: यह सुरंग समुद्र तल से 10,000 फीट की ऊंचाई पर बनी दुनिया की सबसे लंबी मोटरेबल सुरंग है।

हर मौसम में कनेक्टिविटी: यह सुरंग साल भर लाहौल-स्पीति को शेष भारत से जोड़कर रखती है, जो पहले 6 महीने बर्फबारी के कारण बंद रहता था।

यात्रा में समय की बचत: पहले मनाली से केलांग की दूरी तय करने में 5-6 घंटे लगते थे, लेकिन अब अटल सुरंग से यह दूरी सिर्फ डेढ़ घंटे में पूरी हो जाती है।

सुरक्षा और टेक्नोलॉजी: सुरंग में अत्याधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, ऑटोमैटिक फायर अलार्म और इमरजेंसी एग्जिट जैसे सुरक्षा उपाय किए गए हैं।

 

ये है हिमाचल की सबसे लंबी सुरंग, जानिए क्यों पडी इसकी जरूरत, कितनी गति से दोड सकते है इसमें वाहन
ये है हिमाचल की सबसे लंबी सुरंग, जानिए क्यों पडी इसकी जरूरत, कितनी गति से दोड सकते है इसमें वाहन

अटल सुरंग न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि सैन्य दृष्टि से भी यह चीन सीमा पर तैनात भारतीय सेना के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट को मजबूत करती है। यह सुरंग अब हिमाचल प्रदेश के विकास और सुरक्षा के लिए एक बड़ी उपलब्धि बन चुकी है।

 

अटल सुरंग की जरूरत क्यों पड़ी?

अटल सुरंग का निर्माण मुख्य रूप से सामरिक और नागरिक दोनों कारणों से अत्यंत आवश्यक था। इससे पहले मनाली से लाहौल-स्पीति या लेह जाने के लिए लोगों को रोहतांग दर्रा पार करना पड़ता था, जो लगभग 13,050 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और हर साल सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण 5 से 6 महीने तक पूरी तरह बंद हो जाता था। इससे न केवल आम लोगों की आवाजाही बाधित होती थी बल्कि भारतीय सेना को भी सीमावर्ती इलाकों में रसद और सहायता पहुँचाने में भारी कठिनाई होती थी।

Atal Tunnel अटल सुरंग बनने से:

  • लाहौल-स्पीति घाटी पूरे साल देश से जुड़ी रहती है।

  • सेना की आपूर्ति और मूवमेंट अब तेज, आसान और सुरक्षित हो गया है।

  • पर्यटन और स्थानीय विकास को जबरदस्त बढ़ावा मिला है।

  • आपातकालीन स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य संभव हो सका है।

सुरंग में अधिकतम गति सीमा कितनी है?

अटल सुरंग में वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से गति पर सख्त निगरानी रखी जाती है और कुछ जगहों पर वाहन चालकों को धीमी गति से चलने के संकेत भी दिए जाते हैं।

इस सुरंग में लेन बदलने, ओवरटेक करने और अनावश्यक रुकने की मनाही है, ताकि सुरक्षा बनी रहे और ट्रैफिक सुचारु रूप से चले। सुरंग में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे, वेंटिलेशन सिस्टम, फायर सेफ्टी, और इमरजेंसी टेलीफोन बूथ भी लगाए गए हैं।

कुल मिलाकर, अटल सुरंग हिमाचल प्रदेश की जीवनरेखा बन गई है, जो सुरक्षा, संचार और विकास तीनों के लिहाज से बेहद जरूरी और ऐतिहासिक साबित हुई है।Atal Tunnel

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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