BOLLYWOOD: कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनके निभाए किरदार उनकी पहचान बन जाते हैं। पर्दे पर दिखाई देने वाली छवि इतनी मजबूत हो जाती है कि दर्शक कलाकार और किरदार के बीच फर्क करना ही भूल जाते हैं। बॉलीवुड में खासतौर पर खलनायक और वैम्प रोल निभाने वाले कलाकारों के साथ ऐसा कई बार देखने को मिला है। एक ऐसी ही अदाकारा थीं, जिनके वैम्प किरदारों ने उन्हें जबरदस्त शोहरत दिलाई, लेकिन उसी शोहरत की कीमत उन्हें असल जिंदगी में नफरत के रूप में चुकानी पड़ी।BOLLYWOOD
यह अदाकारा थीं बॉलीवुड की मशहूर वैम्प बिंदू। 70 और 80 के दशक में बिंदू का नाम आते ही दर्शकों के मन में एक चालाक, तेजतर्रार और बोल्ड महिला की छवि बन जाती थी। उन्होंने जंजीर, कटी पतंग, हकीकत, अंदाज़ और अमर प्रेम जैसी कई हिट फिल्मों में यादगार किरदार निभाए। जंजीर की ‘मोना डार्लिंग’ के रूप में उनकी पहचान इतनी गहरी हो गई कि लोग उन्हें उसी नाम से पुकारने लगे। फिल्मों में उनके नकारात्मक और बोल्ड किरदार इतने असरदार होते थे कि दर्शक उन्हें असल जिंदगी में भी वैसा ही मानने लगे।

असल जीवन पर पडा प्रभाव: बिंदू खुद कई इंटरव्यू में इस बात का जिक्र कर चुकी हैं कि पर्दे पर वैम्प बनने की वजह से उन्हें असल जिंदगी में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उस दौर में समाज काफी रूढ़िवादी था और फिल्मों को आज की तरह सिर्फ मनोरंजन के तौर पर नहीं देखा जाता था। कई महिलाएं बिंदू को देखकर अपने पतियों को दूर कर लेती थीं। उन्हें लगता था कि जो महिला पर्दे पर इतनी चालाक और ‘खतरनाक’ दिखती है, वह असल जिंदगी में भी वैसी ही होगी।
कई बार सार्वजनिक जगहों पर उन्हें नफरत भरी नजरों का सामना करना पड़ा। वह जानती थीं कि दर्शकों की यह प्रतिक्रिया उनके शानदार अभिनय का ही नतीजा है। चार दशक तक उन्होंने फिल्मों में काम किया और हर बार अपने किरदार में जान डाल दी। उनके लिए यह आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को मजबूती से अपनाया।BOLLYWOOD
बेहतरीन वैम्प्स : समय के साथ दर्शकों की सोच बदली और लोगों ने कलाकार और किरदार के फर्क को समझना शुरू किया। आज बिंदू को बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन वैम्प्स में गिना जाता है, जिनके बिना हिंदी सिनेमा का इतिहास अधूरा माना जाता है। उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि अभिनय की सफलता कभी-कभी कलाकार की निजी जिंदगी को भी गहरे तौर पर प्रभावित कर देती है।BOLLYWOOD

















