धारूहेड़ा: धारूहेडा में ब्लॉक समिति के चैयरमैन केा लेकर बडा बदलाव होने वाला है। बताया जा रहा है वार्ड 5 से राव इंद्रजीत का आशीर्वाद लेकर चेयरमैनी का दावा ठोक दिया है। इसी को लेकर चेयरमैन दलबीर के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव दिया गया है।Block Dharuhera Election
बता दे कि पिछले 20 दिनों से समिति में राजनीतिक हलचल जारी है। 19 सितंबर को 22 में से 16 सदस्यों ने चेयरमैन दलबीर सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग की थी, जिसके बाद मामला एडीसी कार्यालय पहुंचा। इसी को एडीसी ने ब्लॉक समिति मैंबरों को शक्ति प्रदर्शन का न्यौजा दिया है।Block Dharuhera Election
जानिए कौन कौन है समिति मेंबर:

वेदप्रकाश आकेडा. नीलम पत्नी मनोज घटाल, दलबीर महेश्वरी, ललीता पत्नी विनोद महेश्वरी, रोहत कापडीवास राममेहन मालपुरा, रीना पत्नी रविंद्र असदपुर. मनीषा पत्नी अमित खलियावास, धीरज खलियावास. कृष्ण मुडिया खेडा. लाजवंति पत्नी राजेश डूंगरवास
वार्ड बारह : सुखीराम खरकड. स्वीटी पत्नी भरतलाल नंदरामपुर बास; विकास ततारपुर. रजनी पत्नी राकेश दूदा. अभिषेक जडथल, नंर्मदा पत्नी दिनेश आशीयाकी. नवल सिंह भूडल. सोनू पत्नी सुनील बखापुर, लाल बहादुर बगथला, अंजली पत्नी हेमंत बोलनी
हनुमान पीथनवास


वाटिंग पर टिकी निगाहें: अब सबकी निगाहें 24 अक्टूबर पर टिकी हैं। फिलहाल 16 मेंबर चेयरमैन के खिलाफ है ऐसे में चेरमैन की कुसी जा सकती है। इतना यह कहा जा रहा है वार्ड 5 के रोहित यादव ने रावसाहव से मिलकर आशीर्वाद लिया है ऐसे में एक बार फिर उसकी जीत को लेकर ब्लॉक समिमि मेंबर जी जान से जूट गए है।
24 को होगा फैसला: वैसे सही तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा। अनुमान लगाया जा रहा है एक मैंबर के पीछे सारी राजनीति घूम रही है। वह जिस पक्ष में जाएगा उसी ओर जीत संभव है। अब देखना है यह है क्या दलबीर सिंह अपनी कुर्सी बचा पांएगे या नहीं
जानिए कौन है रोहित: बता दे रोहित एक समाजसेवी है। कापडीवास मे एक सामाजिक संगठन के सहयोग व गांव में स्वास्थ्य जांच शिविर, रक्तदान शिविर, सफाई अभियान, पौधारोपण व कई अन्य सामाजिक कार्यो में शामिल है। उनकी समाजसेवा में रूचि के चलते उसे ताल ठोकने का मौका दिया गया है।
दलबीर पर आरोप: बता दे कभी दलबीर भी भाजपा के सहयोग से जीते थे लेकिन उसकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे है विकास कार्यो लापरवाही के साथ भेदभाव के चलते ही बाकि मैंबरो का गुस्सा उनके खिलाफ आवाज उठाने का मजूबर हो गया है। अब सवाल यह है कि क्या वह अपनी कुर्सी बचा पाएगा।

















