Bhiwadi: 12 फरवरी 2026 को माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर बेंच ने एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 8225/2024 में ऐतिहासिक निर्णय पारित करते हुए बी.डी.आई. सनशाइन सिटी, भिवाड़ी के समस्त निवासियों एवं बी.डी.आई. रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी (RWA) के वैधानिक अधिकारों की स्पष्ट पुष्टि की है।
माननीय न्यायालय ने सक्षम प्राधिकारी द्वारा दिनांक 20.03.2024 को पारित आदेश को अधिकार क्षेत्र से परे (Excess of Jurisdiction) मानते हुए निरस्त (Quashed and Set Aside) कर दिया।
*संघर्ष से निर्णय तक: न्याय की जीत* बी.डी.आई. रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष श्री राकेश कौशिक ने बताया कि यह याचिका राजस्थान अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट, 2015 तथा मॉडल बाई-लॉज़, 2020 के प्रभावी अनुपालन हेतु दायर की गई थी। इसका उद्देश्य था:
– सोसाइटी के प्रबंधन का विधिसम्मत हस्तांतरण
– कॉमन एरिया, क्लब हाउस, पार्क एवं अन्य सामुदायिक सुविधाओं का सुपुर्दगी
– अभिलेख, खातों एवं परिसंपत्तियों का हस्तांतरण
– अधिनियम 2015 के उल्लंघन पर विधिक कार्यवाही
– क्लब हाउस एवं पार्क में कथित अवैध होटल संचालन पर रोक
– निवासियों के अधिकारों के हनन पर प्रति माह ₹30 लाख मेसने प्रॉफिट की मांग
*प्रकरण की पृष्ठभूमि*
सोसाइटी ने अधिनियम 2015 के तहत भिवाड़ी इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट अथॉरिटी (BIDA) के समक्ष निर्धारित प्रपत्र (Form-B) में शिकायत प्रस्तुत की थी।
*20 जुलाई 2022 का महत्वपूर्ण आदेश*
सक्षम प्राधिकारी ने 20.07.2022 को आदेश पारित कर स्पष्ट किया कि सोसाइटी अधिनियम के अनुरूप आवश्यक कार्यवाही कर सकती है, जिसमें मेंटेनेंस एजेंसी परिवर्तन सहित प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है।
👉 इस आदेश के विरुद्ध अधिनियम की धारा 26 के अंतर्गत कोई अपील दायर नहीं की गई।
👉 फलस्वरूप, यह आदेश अंतिम एवं बाध्यकारी हो गया।
*निष्पादन कार्यवाही और विवाद*
आदेश के अनुपालन हेतु सोसाइटी ने निष्पादन आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर 20.02.2024 को सक्षम प्राधिकारी ने आदेश पारित कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने एवं वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए।
इसके लगभग दो वर्ष पश्चात प्रतिवादी पक्ष द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर की गई। 20.03.2024 को पारित आदेश में निष्पादन आदेश पर टिप्पणी करते हुए उसे मूल आदेश से असंगत बताया गया।
*माननीय राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर की स्पष्ट टिप्पणी*
माननीय न्यायालय ने अपने विस्तृत आदेश में कहा:
– 20.02.2024 के निष्पादन आदेश को किसी न्यायिक मंच पर चुनौती नहीं दी गई थी।
– ऐसे में 20.03.2024 के पुनर्विचार आदेश में उस पर टिप्पणी करना अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
– 20.07.2022 का मूल आदेश अंतिम हो चुका था।
– 20.03.2024 का आदेश विधिसंगत नहीं है और उसे निरस्त किया जाना उचित है।
माननीय न्यायालय ने रिट याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए विवादित आदेश को रद्द कर दिया।
*निवासियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि*
अध्यक्ष श्री राकेश कौशिक ने कहा कि यह निर्णय निम्न महत्वपूर्ण सिद्धांतों को स्थापित करता है:
– अधिनियम 2015 की अवहेलना स्वीकार्य नहीं है।
– सक्षम प्राधिकारी अपनी वैधानिक सीमाओं से बाहर जाकर निर्णय नहीं दे सकता।
– सोसाइटी के लोकतांत्रिक और वैधानिक अधिकार न्यायालय द्वारा संरक्षित हैं।
*आगे की रणनीति*
बी.डी.आई. रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी निम्न सुनिश्चित करेगी:
– सामान्य क्षेत्रों एवं सुविधाओं का विधिसम्मत हस्तांतरण
– पारदर्शी एवं उत्तरदायी प्रबंधन प्रणाली
– अधिनियम 2015 का पूर्ण अनुपालन
– निवासियों के हितों की रक्षा हेतु आवश्यक वैधानिक कदम
श्री राकेश कौशिक ने कहा:
“यह केवल एक न्यायिक आदेश नहीं, बल्कि प्रत्येक निवासी के सम्मान, अधिकार और सुरक्षा की पुष्टि है। हमने कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ी और न्यायालय ने हमारी बात को स्वीकार किया।
मैं सभी निवासियों का धन्यवाद करता हूँ जिन्होंने इस लंबी कानूनी प्रक्रिया में धैर्य, एकजुटता और विश्वास बनाए रखा। हमारा संकल्प है कि बी.डी.आई. सनशाइन सिटी को एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और विधिसम्मत आवासीय परिसर के रूप में विकसित किया जाए, जहाँ पारदर्शी प्रशासन और कानूनी संरक्षण सुनिश्चित हो।”
राजस्थान हाईकोर्ट का यह निर्णय न केवल बी.डी.आई. सनशाइन सिटी के निवासियों की जीत है, बल्कि राज्य की अन्य आवासीय सोसाइटीयों के लिए भी एक मार्गदर्शक न्यायिक उदाहरण है कि वैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु न्यायपालिका सजग और प्रतिबद्ध है।
















