लाखों रूपए का टेंडर देने के बावजूद शौचालयों की हालत बदहाल
टूटी टाईल, पानी की व्यवस्था नहीं, रात को लाईट नहीं
धारूहेडा: सुनील चौहान। शहर को स्वच्छ और खुद को ओडीएफ प्लस होने का दावा करने वाला नगर पालिका करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों की हालत बदहाल बनी हुई है। देख रेख के अभाव मे विभिन्न स्थानों पर बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बदहाल है। लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए इन सार्वजनिक शौचालयों पर गंदगी व बदबू से बुरा हाल है।बिना फेरे लिए रेवाड़ी से दुल्हन की विदा, 100 से अधिक लोंगो पर मामल दर्ज ?
इन स्थानों पर है शॉचालय
भगत सिंह चौक 1
अनुसूचित धर्मशाला 1
बिजली बोर्ड 1
सेक्टर छह मार्कट 1
नपा कार्यालय 1
फायर बिग्रेड 1
नपा बिल्डिंग 1
यहां पर है भी जरूरत:
कस्बे में केवल चार जगह ही सार्वजनिक शौचालय है। बढती आबादी के चलते केवल चार शोचालय उंंट के मुहं में जीरा के समान है। बस स्टैंड, बास रोड , सेक्टर चार, सोहना रोड, मुख्य बाजार के पास शोचालय होने चाहिए। आजादी के चलते इस स्थानो पर शोचालय होना बहुत जरूरी है। वार्ड चार के पार्षद राजकुमार ने बताया कि धर्मपाल के पास बनी टायॅलेट की वह स्वयं कई शिकायत फोटो सहित कर चुका है। टायलेट में पानी की व्यवस्था ही नहीं है। शिकायत करने पर कर्मचारी सफाई कर देता है, लेकिन पानी नहीं होने चलते वही हालत फिर हो जाती है.Rewari Police Station का घेराव, सैनी समाज के लोगों ने काटा बवाल 
बडा सवाल: सबसे अहम बात यह है कि जब सार्वजनिक शोचालय ही चार है तो फिर 7 का टेंडर क्यों दिया गया है। कार्यालयो में बने शोचालयो की सफाई के लिए अलग से कर्मचारी लगाये है। ऐसे में टेंडर देकर कार्यलयो में लगाए गए सफाई कर्मचारियों का काम भी खत्म कर दिया है। यहां पर भी भेदभाव किया जा रहा है। उपतहसील के शोचालय में टेंडर फिर क्यों नही दिया। वहा पर सफाई को लेकर बुरा हाल है। नायब तहसीलदार श्याम सुदंर का का कहना है नपा से सफाई कर्मचारी कभी कभार साफ करने आते है ज्यादातर समय तो फोन करके बुलाने पडते है।
अजीब खेल: नपा ने फरवरी 2023 से सात टायलेट का टैंडर 6 लाख 88 हजार में दिया गया है। शोचालयों को नियमित सफाइ ही नही की जा रही है। लोगो ने बताया कि अनुसूचित धर्मशाला के साथ् बने शोचालय तो आजकल शराब पीने को ठहिया बना हुआ है। महिला शोचालय में तो इससे भी बुरा हाल है। टायले टूटी हुई है। न ही पानी की व्यवस्था तथा न ही रात को लाइट की व्यवथा है। हर माह एजेंसी का 57 हजार 400 रूपए का बिल पास हो जाता है।
















