SYL मामले में SC ने दिखाई सख्ती, पंजाब सरकार को दिया ये आदेश

On: October 4, 2023 7:40 PM
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चंढीगढ: कई सालों से चले आ रहे सतलुज यमुना लिंक SYL के विवाद पर अब सुप्रीम कोर्ट ने कडा रूख अपना लिया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करें। इतना ही यह तक भी कह दिया कि कोर्ट से ऊपर न जाए, कोर्ट की गरीमा का पालन करें, नहीं तो सुप्रीम कोर्ट कार्रवाई करने को मजबूर होगा।Rewari: महेश्वरी में गाली गलोज, जातिसूचक शब्द कहने को लेकर हुई महापंचायत, जानिए क्या हुआ फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘आप हमें सख्त एक्शन लेने के लिए मजबूर नहीं करें। हम नहीं चाहते हैं कि हम इस मुद्दे पर कोई सख्त आदेश पारित करें, इस मामले में राजनीति नहीं होना चाहिए.’

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में होने वाली डेवलपमेंट के बारे में रिपोर्ट देने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई अब जनवरी 2024 में होगी। सुप्रीम कोर्ट की पंजाब से नराजगी जताते हुए साफ कहा है कि पजांब सरकार समस्या के समाधान की ओर ध्यान न देकर मुद्दे को भटका रही है।मसालों की खेती पर सरकार दे रही 50 फीसदी सब्सिडी, फायदा उठाने के लिए इस पोर्टल पर करें अप्लाई

20 साल लटका है मामला
पंजाब सरकार नहीं चाहती कि इसका हल निकले। पिछली 2 मीटिंगों में कोई हल नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कहा कि पंजाब की तरफ SYL नहर की मौजूदा स्थिति सर्वे की प्रक्रिया शुरू की जाए। हरियाणा सरकार ने सुनवाई के दौरान कहा कि 2 दशक से यह विवाद उलझा हुआ है। पंजाब सरकार इसे सिरियस ही नहीं ले रही है।

राजस्थान सरकार ने भी कहा कि पंजाब सरकार का रुख इस दिशा में आगे बढ़ने के जैसा नहीं लग रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हरियाणा में SYL नहर बनाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है, लिहाजा पंजाब भी इस समस्या का हल निकालने की दिशा में काम करे।
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क्या है सतलज यमुना लिंक विवाद?
पंजाब और हरियाणा के बीच सतलज यमुना लिंक विवाद की शुरुआत 1 नवंबर, 1966 को राज्य पुनर्गठन के बाद से ही शुरू हो गया था। राज्य पुनर्गर्ठन अधिनियम के मुताबिक जब पंजाब से अलग होकर हरियाणा अस्तित्व में आया तो दोनों राज्यों के बीच कई बंटवारों में से एक जल बंटवारा नहीं हो सका।

उस समय तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दखल के बाद यह तय हुआ कि दोनों राज्यों के बीच नहर खोदी जाएगी ताकि दोनों राज्यों को पानी मिल सके। इस काम को 1991 तक पूरा हो जाना था लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका।

P Chauhan

मै पीके चौहान पिछले 6 साल में पत्रकारिता में कार्यरत हूं। मेरे द्वारा राजनीति, क्राइम व मंनोरजन की खबरे अपडेट की जाती है।

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