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रेवाडी के लोको शेड में चल रही शंकरन मूवी की शूटिंग, जानिए क्या है यहां की खासियत

On: June 8, 2023 9:26 PM
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अक्षय कुमार सहित कई कालाकार पहुंच रेवाडी, फेंस की उमडी भीड
रेवाडी: रेवाडी के लोकोशेड को 3 दिन के आमजन के लिए बंद कर दिया गया है। इसे फिल्म की सूटिंग के पहले से ही बुक कराया हुआ है। अक्षय कुमार को देखने के लिए उनके फेंस कल से ही लोकोशेड के आसपास मौजूद हैं।

रेवाडी पहुंचे कई स्टार

धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बन रही निर्माता निर्देशक करण जौहर की शंकरन मूवी में अक्षय कुमार लीड रोल में नजर आएंगे। जिसके चलते 7 से 9 जून तक के लिए पहले से बुक करा दिया गया था।

LOKO SHED 2

बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार और अभिनेत्री अनन्या पांडे शंकरन मूवी की शूटिंग के लिए रेवाड़ी पहुंचे हुए हैं। ऐतिहासिक हेरिटेज लोकोशेड में फिल्म के काफी सीन फिल्माए जा रहे हैं।

अकबर, अंगद, सुल्तान और शहंशाह आज भी ‘जिंदा

आपको जानकर हैरानी होगी कि अकबर, अंगद, सुल्तान और शहंशाह आज भी ‘जिंदा’ हैं और हरियाणा के रेवाड़ी में ही रहते हैं। ये कोई और नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे पुराने स्टीम इंजन हैं, जो आज भी मौजूद हैं।
एक शहर के लोको शेड में खड़े हैं। इन इंजनों में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी सबसे पुराना और सबसे हल्का फेयरी क्वीन शामिल है। सबसे भारी इंजन अंगद भी शुमार है। इसके अलावा आजादी का प्रतीक बना भाप का इंजन आजाद और अकबर भी शामिल हैं। ये सभी हरियाणा में रेवाड़ी जिले के लोको शेड में मौजूद हैं।

LOKO SHED REWARI

यहां कई बॉलीवुड फिल्मों, जैसे ‘गुरु’,‘गांधी-माई फादर’,‘रंग दे बसंती’,‘गदर एक प्रेम कथा’,‘भाग मिल्खा भाग’,‘1942-ए लव स्टोरी’,‘सुल्तान’ आदि की शूटिंग हुई है। दो साल पहले सलमान खान खुद रेवाड़ी लोकोशेड में ‘सुल्तान’ फिल्म की शूटिंग करने पहुंचे थे। वहां दो दिन तक उन्होंने ऐतिहासिक भाप इंजन ‘अकबर’ के साथ दौड़ लगाई थी।

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भारतीय रेलवे ने 15 अगस्त, 1947 को अमेरिका से पहली बार ‘आजाद’ नामक भाप का इंजन मंगाया था। उसकी याद में इस वर्ष अप्रैल में नई दिल्ली से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के बीच ‘आजाद’ को दोबारा पटरियों पर दौड़ाया गया। चितरंजन लोको वर्क्स में निर्मित ‘अकबर’ नामक इंजन को पहली बार 1965 में चलाया गया था।
 
फेयरी क्वीन
  • निर्माण सन: 1855(यूनाइटेड किंगडम)
  • स्पीड: 40 किमी/घंटा
  • इंजन:130 हॉर्स पावर
  • इंजन वजन : 26 टन
  • इतिहास : ईस्ट इंडिया कंपनी फेयरी क्वीन को लेकर भारत में आई थी। 1998 में इसे दुनिया के सबसे पुराने चालू हालत के भाप के इंजन के रूप में गिनीज रिकॉर्ड मिला था। यह ट्रेन पहले दिल्ली और अलवर के बीच फेयरी क्वीन स्पेशल के नाम से चलती थी। इसके अलावा भाप के सबसे हल्के इंजनों में भी यह शामिल है। सुंदरता के चलते इस सबसे हल्के भाप के इंजन का नाम फेयरी क्वीन रखा गया।
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LOKO SHED 3

 

आजादी का प्रतीक बना है आजाद

  • निर्माण : सन 1947(अमेरिका)
  • स्पीड :100 किमी/घंटा
  • इंजन : 1445 हॉर्स पावर
  • इंजन वजन : 174.28 टन
  • इतिहास : इंजन का नाम ही इसकी काफी हद तक विशेषता बताता है, ‘आजाद’। अमेरिका में बने इस इंजन को यूनाइटेड स्टेट और अमेरिका ने भारत की आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को बतौर उपहार भेंट किया था। इसी के चलते इस इंजन का नाम आजाद रखा गया। यह इंजन आज भी भारत की आजादी का प्रतीक बना हुआ है।

 

अकबर और शहंशाह भी किसी से कम नहीं हैं
विशुद्ध रूप से भारतीय भाप का इंजन अकबर भी किसी से कम नहीं है। गदर, भाग मिल्खा भाग, गांधी माई फादर, गैंग्स ऑफ वासेपुर समेत कई बड़ी सुपरहिट फिल्मों में इस इंजन का उपयोग किया गया है।
रेवाड़ी में अकबर का एक साथी भाप इंजन भी है ‘डब्ल्यूपी 7200’। यह कहीं अधिक पुराना है।लड़का 10वीं में 35% नंबर लाया, मां-बाप ने UPSC टॉपर जैसा जश्न मनाया, देखिए वीडियो
इसे 1947 में बॉल्डविन लोकोमोटिव वर्क्स ने बनाया था। पहले इसे हावड़ा में रखा गया। बाद में 15 अगस्त, 1947 को इस इंजन को भारतीय रेल को तोहफे में दे दिया गया। हालांकि यह भारत अक्टूबर 1947 में पहुंचा।

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शुरुआत में इसे ‘शहंशाह’ का नाम दिया गया था, लेकिन देश की आजादी के दिन मिलने के कारण इसे ‘आजाद’ नाम दिया गया। ब्रॉड गेज के इस इंजन को 1993 में दिल्ली स्थित नेशनल रेल म्यूजियम में रखा गया।

सबसे भारी और विशाल इंजन है अंगद का

  • निर्माण सन्: 1930(इंग्लैंड)
  • स्पीड: 75 किमी/घंटा
  • इंजन: 1492 हॉर्स पावर
  • इंजन वजन : 200टन
  • इतिहास: नाम और काम दोनों से ही अंगद है इंग्लैंड में बना भाप का सबसे भारी इंजन अंगद। 200 टन वजनी इस इंजन की चौड़ाई अन्य इंजनों की तुलना में करीब आधा फुट ज्यादा है। कारण यह इंजन रेल डिपार्टमेंट का नहीं बल्कि कोरबा थर्मल पावर स्टेशन में कोयला ढोने के काम में लाया जाता था। बताया जाता है अगर यह इंजन चलकर प्लेटफार्म साइड आए और प्लेटफार्म भी तोड़ दे।

 

 

अमेरिका के लिए तोप, बंदूकें और गोले ले जाता था विराट
  • निर्माण सन्: 1943(अमेरिका)
  • स्पीड:75 किमी/घंटा
  • इंजन:1520 हॉर्स पावर
  • इंजन वजन : 189 टन
  • इतिहास : अमेरिका में निर्मित भाप का इंजन विराट अमेरिकन वार डिपार्टमेंट के लिए असलहा जैसे तोप, बंदूकें, गोले आदि ढोने का काम करता था। तब भारत में भाप के इंजन नहीं बनते थे। उस समय इसे भारत ने अमेरिका से लिया था। विराट को अपनी कार्यक्षमता, वजन और स्पीड के सामंजस्य के लिए जाना जाता है।

Harsh

मै पिछले पांच साल से पत्रकारिता में कार्यरत हूं। इस साइट के माध्यम से अपराध, मनोरंजन, राजनीति व देश विदेश की खबरे मेरे द्वारा प्रकाशित की जाती है।

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