हरियाणा: अक्सर लोग पढाई करके नौकरी के प्रयास करते है। कुछ को सफलता मिल जाती है तो कुछ लोग असफल भी हो जाते है। लेकिन कई किसानो तो बागवानी खेती से इतना मुनाफा ले रहे कि वे युवाओ के प्रेरणा स्त्रोत बने हुए है धर्मवीर के आडू की मिठास लोगों को इतनी पसंद आ रही है कि वो फसल आने का इंतजार करते हैं।Haryana News: हथियार के बल पर भिवानी में स्वर्णकार से लाखों की लूट
बागवानी खेती में कम लागत से अधिक मुनाफा तो मिलता ही है। साथ ही, पानी की बचत भी होती है। हरियाणा के एक किसान ने बागवानी खेती अपनाकर अन्य किसानों के सामने उदाहरण पेश किया है।
आधुनिकता के इस युग में देशभर में किसान परम्परागत खेती का मोह त्याग कर बागवानी खेती की ओर बढ़ रहे हैं और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर बंपर पैदावार भी ले रहे हैं।
किसान ने बतायास कि गेहूं, धान, नरमा और सरसों जैसी परंपरागत फसलों को छोड़ किसान अब ऐसी खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं जिसमें कम लागत के साथ अधिक मुनाफा तो मिलता ही है।
साथ ही पानी की बचत कर समाज में अपना योगदान दे रहे हैं। फतेहाबाद के गांव धांगड़ निवासी धर्मवीर जो कि लॉ ग्रुजेएट हैं। धर्मवीर ने ऐसी खेती पद्धति को अपनाया और अपने खेत में आडू का बाग लगा कर बागवानी शुरु की।
फलों और सब्ज़ियों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं चलाई जा रही है, जिसमें किसानों को 50 से 100 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है।
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आम, अमरूद, केला जैसे प्रमुख फलों के उत्पादन के साथ ही प्रदेश के किसान आड़ू की खेती भी अपना रहे हैं। किसान कम समय में अच्छा उत्पादन देने वाले इस फल का उत्पादन कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। प्रदेश के तराई क्षेत्रों में उचित जलवायु होने की वजह से आड़ू की अच्छी पैदावार हो रही है।
जानिए किसान धर्मबीर की कहानी
धर्मवीर के आडू की मिठास लोगों को इतनी पसंद आ रही है कि वो फसल आने का इंतजार करते हैं। इतना ही लोग उनसे इस खेती की जानकारी ले रहे है।
फतेहाबाद जिले के गांव धांगड़ निवासी किसान धर्मवीर ने लॉ ग्रेजुएट की पढ़ाई की है। उन्होंने आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपने खेत में आडू का बाग लगाकर बागवानी खेती की शुरुआत की।
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धर्मवीर ने बताया कि जब उन्होंने बाग लगाया तो सरकार की तरफ से भी आर्थिक सहायता दी गई थी। सरकार की ओर से पौधों के रखरखाव, सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन और पानी के टैंक के लिए 100% सब्सिडी दी गई थी।
धर्मवीर अपने आडू के बाग में किसी भी तरह के रासायनिक खाद और उर्वरक का इस्तेमाल नहीं करते हैं। आज उनके बाग की चर्चा फतेहाबाद ही नहीं बल्कि देश- विदेश तक हो रही है.
धर्मवीर ने कहा कि अगर सरकार उनके प्रोडेक्ट को बेचने के लिए डायरेक्टर सेलिंग का प्लेटफार्म मुहैया करवा दे तो आमदनी में और अधिक इजाफा हो सकता है।
उन्होंने किसानों के लिए एक मैसेज भी दिया कि किसान अधिक पानी वाली फसलों का मोह त्याग कर इस प्रकार की फसलों पर अपना ध्यान दे तो वह कम लागत में और लंबे समय तक मुनाफा ले सकते हैं।
फलों और सब्ज़ियों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं चलाई जा रही है, जिसमें किसानों को 50 से 100 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है।

















