Faridabad | हर साल मार्च का महीना आमतौर पर हल्की गर्मी और सुहावने मौसम के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार मौसम ने अचानक करवट ले ली है। तापमान में तेजी से बढ़ोतरी और दिन-रात के तापमान में उतार-चढ़ाव ने लोगों की सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया है। खासतौर पर छोटे बच्चों की सेहत पर इसका प्रभाव ज्यादा देखने को मिल रहा है। हरियाणा के फरीदाबाद में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार के मामलों में अचानक तेजी आई है। अस्पतालों और क्लीनिकों में बच्चों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में बच्चों से जुड़ी सामान्य बीमारियों के मामलों में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम में अचानक बदलाव के कारण बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे वे जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं।
मौसम का बदलता मिजाज ?
फरीदाबाद के कई अस्पतालों में इन दिनों बच्चों के मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। अभिभावक अपने बच्चों को सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और गले में दर्द जैसी समस्याओं के कारण डॉक्टर के पास लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मार्च के महीने में आमतौर पर धीरे-धीरे गर्मी बढ़ती है, लेकिन इस बार तापमान में अचानक वृद्धि ने शरीर को मौसम के अनुकूल ढलने का मौका नहीं दिया बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील सिंगला के अनुसार, मौसम में अचानक बदलाव होने पर बच्चों का शरीर उसे जल्दी स्वीकार नहीं कर पाता। इससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी प्रभावित होती है। यही वजह है कि बच्चों में वायरल संक्रमण, एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में कमजोर होती है। ऐसे में अगर तापमान अचानक बदल जाए या दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर हो तो बच्चों को संक्रमण होने की संभावना ज्यादा रहती है।
बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान ?
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। सबसे पहले बच्चों के खानपान पर ध्यान देना चाहिए। पौष्टिक आहार जैसे फल, हरी सब्जियां, दाल और दूध बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा बच्चों को पर्याप्त पानी पिलाना भी जरूरी है, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। कई बार मौसम बदलने के कारण शरीर में पानी की कमी भी कमजोरी और संक्रमण का कारण बन सकती है। डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चों को धूल, प्रदूषण और ठंडी हवा से बचाकर रखना चाहिए। अगर बच्चे बाहर खेलते हैं तो घर लौटने के बाद हाथ-पैर अच्छी तरह से धुलवाना चाहिए। साफ-सफाई का ध्यान रखने से कई तरह के संक्रमण से बचाव संभव है। इसके साथ ही बच्चों को मौसम के हिसाब से कपड़े पहनाना भी जरूरी है। सुबह और शाम के समय हल्की ठंड हो सकती है, जबकि दिन में गर्मी बढ़ जाती है। ऐसे में हल्के लेकिन शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाना बेहतर होता है।
अगर बच्चे को लगातार बुखार, तेज खांसी, सांस लेने में तकलीफ या कमजोरी महसूस हो रही हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से बीमारी गंभीर होने से बचाई जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में उतार-चढ़ाव एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन अगर लोग थोड़ी सावधानी बरतें और बच्चों की दिनचर्या, खानपान और साफ-सफाई पर ध्यान दें तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है। बदलते मौसम में सतर्कता ही बच्चों की सेहत की सबसे बड़ी सुरक्षा है।
















