अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष का असर Panipat की उद्योग पर

On: March 12, 2026 11:44 AM
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Effect of the US-Israel and Iran Conflict on Panipat Industries

हाल ही में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब हर क्षेत्र में महसूस किया जा रहा है। खासतौर पर Panipat की उद्योग नगरी में इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है। पानीपत, जो अपने हैंडलूम और टेक्सटाइल उद्योग के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है, इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। यहां से विश्व स्तर पर कंबल, डाई हाउस प्रोडक्ट्स और हैंडलूम के निर्यात होते हैं, लेकिन एलजी गैस की कमर्शियल सप्लाई बंद होने से उद्योगों की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

Effect of the US-Israel and Iran Conflict on Panipat Industriesपानीपत की करीब 250 से ज्यादा इंडस्ट्रीज एलपीजी पर निर्भर हैं। इनमें मुख्य रूप से डाई हाउस और कंबल उद्योग शामिल हैं। इन उद्योगों की संचालन क्षमता इस समय संकट में है क्योंकि कमर्शियल सिलेंडरों की उपलब्धता नहीं हो पा रही। पानीपत की स्थानीय गैस एजेंसी की संचालिका गीता बत्रा ने बताया कि फिलहाल कमर्शियल सिलेंडरों पर रोक लगी हुई है और गोदाम में इस समय कोई स्टॉक उपलब्ध नहीं है।

कमर्शियल सिलेंडर की कमी और उद्योगों की समस्या ?

गीता बत्रा के अनुसार, उनका फोकस इस समय केवल डोमेस्टिक सिलेंडरों की आपूर्ति पर है। हालांकि, डोमेस्टिक सिलेंडरों की बुकिंग फिलहाल 25 दिनों में हो रही है, लेकिन जो उद्योग कमर्शियल सिलेंडरों पर निर्भर हैं, वे पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इससे पानीपत की टेक्सटाइल और हैंडलूम इंडस्ट्री में उत्पादन धीमा हो गया है और निर्यात में भी रुकावट आई है। कई उद्योग मालिकों ने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और उत्पादन निरंतरता को लेकर चिंता व्यक्त की है। हरियाणा चेंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन विनोद धमीजा ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एलजी की बंद आपूर्ति से पानीपत के उद्योग संकट के कगार पर हैं। उनका कहना है कि उद्योगों की समस्याओं का समाधान जल्द ही होना चाहिए ताकि उत्पादन और निर्यात में रुकावट न आए। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से इस मामले पर शीघ्र बैठक करने की योजना बनाई है।

पानीपत के उद्योगों के लिए एलजी गैस की निरंतर आपूर्ति जीवनरेखा की तरह है। एलजी की कमी के कारण कई उद्योगों को अपनी उत्पादन प्रक्रिया को धीमा करना पड़ा है। यह स्थिति न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही है, बल्कि विश्व स्तर पर पानीपत की टेक्सटाइल और हैंडलूम की प्रतिस्पर्धा पर भी दबाव डाल रही है। इस समय उद्योगपति आपूर्ति की कमी को देखते हुए वैकल्पिक समाधानों की तलाश कर रहे हैं। कुछ उद्योगों ने अपने उत्पादन में बदलाव किए हैं, जबकि कुछ ने डोमेस्टिक सिलेंडरों का उपयोग बढ़ाकर उत्पादन जारी रखने की कोशिश की है। हालांकि, यह उपाय सीमित रूप से ही कारगर साबित हो रहे हैं। पानीपत की टेक्सटाइल और हैंडलूम इंडस्ट्री इस समय न सिर्फ आर्थिक दबाव का सामना कर रही है, बल्कि इसके साथ ही रोज़गार पर भी असर पड़ा है। कई छोटे और मध्यम उद्योगों में कर्मचारियों की संख्या में कटौती की संभावना बनी हुई है। इससे स्थानीय लोगों की जीवनशैली और रोज़गार की स्थिरता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति जल्दी बहाल नहीं हुई तो पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के निर्यात में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही वैश्विक बाजार में भारत के हैंडलूम और कंबल प्रोडक्ट्स की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है। उद्योगों की यह स्थिति राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है। उद्योगपतियों का मानना है कि एलजी आपूर्ति की समस्या को जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता है ताकि निर्यात और उत्पादन प्रभावित न हों। सरकार द्वारा कमर्शियल सिलेंडरों पर लगी रोक को हटाकर उद्योगों को राहत प्रदान करना आवश्यक है। पानीपत के उद्योगों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार और उद्योग मिलकर समस्या का समाधान खोजें, तो स्थिति में सुधार संभव है। इसके लिए उद्योगों को एलजी गैस की वैकल्पिक आपूर्ति चैनल और सरकार द्वारा समर्थन की आवश्यकता है।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने स्थानीय अर्थव्यवस्था पर अप्रत्यक्ष लेकिन गंभीर असर डाला है। पानीपत की टेक्सटाइल और हैंडलूम इंडस्ट्री न सिर्फ भारत की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं, बल्कि विश्व स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व भी करती हैं। इसलिए उद्योगों की निरंतरता और उत्पादन क्षमता को बनाए रखना हर स्तर पर महत्वपूर्ण हो गया है

P Chauhan

मै पीके चौहान पिछले 6 साल में पत्रकारिता में कार्यरत हूं। मेरे द्वारा राजनीति, क्राइम व मंनोरजन की खबरे अपडेट की जाती है।

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