हरियाणा के Kurukshetra में बैंक से लिया गया लोन नहीं चुकाने और गिरवी रखी जमीन को बेचने के आरोप में गिरफ्तार आरोपी बलदेव सिंह को अदालत से राहत नहीं मिली है। कुरुक्षेत्र की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि यह आर्थिक अपराध है और अभी मामले की जांच जारी है, इसलिए इस समय आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा। यह मामला कुरुक्षेत्र सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। बैंक के शाखा प्रबंधक अनुज भारद्वाज ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आरोपी ने बैंक से बड़ी रकम का लोन लिया था, लेकिन उसे चुकाने के बजाय बैंक को नुकसान पहुंचाने की साजिश रची। इस मामले में 19 मार्च 2025 को थाना केयूके में भारतीय दंड संहिता की धारा 406 और 420 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
लोन लेकर जमीन गिरवी रखने का मामला ?
शिकायत के अनुसार, बलदेव सिंह ने वर्ष 2014 में कुरुक्षेत्र सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक से करीब 26 लाख रुपये का लोन लिया था। इस लोन के बदले उसने अपनी 99 कनाल 17 मरला जमीन बैंक के पास गिरवी रखी थी। बैंक के नियमों के अनुसार जब तक लोन की पूरी राशि और ब्याज का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक गिरवी रखी गई संपत्ति को बेचा या किसी अन्य के नाम ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। बैंक अधिकारियों के मुताबिक, समय के साथ लोन पर ब्याज बढ़ता गया और कुल बकाया राशि करीब 50 लाख रुपये तक पहुंच गई। बैंक कई बार आरोपी से राशि जमा करवाने के लिए संपर्क करता रहा, लेकिन उसने लोन चुकाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद बैंक ने मामले की जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने बैंक की अनुमति के बिना ही गिरवी रखी गई जमीन को किसी अन्य के नाम ट्रांसफर कर दिया। बैंक के अधिकारियों का आरोप है कि यह कदम बैंक को धोखा देने की नीयत से उठाया गया था। इसी आधार पर बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
जमीन ट्रांसफर कर बैंक को नुकसान पहुंचाने का आरोप ?
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने पहले गिरवी जमीन को मंजू नाम की महिला के नाम ट्रांसफर कर दिया। बाद में यह जमीन मंजू के पति भाग सिंह के नाम कर दी गई। बैंक का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया बैंक की जानकारी और अनुमति के बिना की गई, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में यह भी दलील दी गई कि आरोपी का यह कृत्य एक गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है। अदालत को बताया गया कि इस मामले में एक अन्य सह-आरोपी भी शामिल है, जिसकी अभी तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। ऐसे में यदि मुख्य आरोपी को जमानत दे दी जाती है तो जांच प्रभावित होने की आशंका है।
अभियोजन पक्ष ने अदालत से कहा कि आरोपी को जमानत मिलने पर वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है या मामले से जुड़े अन्य लोगों को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा सह-आरोपी की गिरफ्तारी और आगे की जांच पर भी असर पड़ सकता है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसमें बैंक के साथ कथित धोखाधड़ी की बात सामने आई है। अदालत ने यह भी कहा कि फिलहाल जांच जारी है और कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल अभी बाकी है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी बलदेव सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। वहीं पुलिस इस मामले में आगे की जांच जारी रखे हुए है और सह-आरोपी की तलाश भी की जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक लोन से जुड़े मामलों में यदि गिरवी रखी संपत्ति को बिना अनुमति किसी अन्य के नाम ट्रांसफर किया जाता है, तो इसे गंभीर आर्थिक अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में अदालतें आमतौर पर सख्त रुख अपनाती हैं ताकि वित्तीय संस्थानों के हितों की रक्षा की जा सके। फिलहाल इस मामले में आगे की सुनवाई आने वाले दिनों में होगी, जिसमें जांच के आधार पर पुलिस अदालत में अपना पक्ष रखेगी। वहीं बैंक भी अपने नुकसान की भरपाई के लिए कानूनी प्रक्रिया जारी रखे हुए है।

















