Haryana में मार्च महीने की शुरुआत के साथ ही गर्मी लगातार तेज होती जा रही है। मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि राज्य के कई जिलों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जो इस समय के हिसाब से काफी ज्यादा माना जा रहा है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार महेंद्रगढ़ प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा भिवानी में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। हिसार में भी गर्मी का असर साफ दिखाई दिया और यहां अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। लगातार बढ़ते तापमान ने आम लोगों के साथ-साथ किसानों को भी परेशान कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी तरह तापमान बढ़ता रहा तो इसका असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है। खासतौर पर इस समय गेहूं की फसल के लिए मौसम काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मार्च के दौरान गेहूं की फसल में दाना बनने की प्रक्रिया चलती है और इसी समय अधिक तापमान फसल के विकास को प्रभावित कर सकता है।
बढ़ते तापमान का गेहूं की फसल पर असर ?
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर डागर के अनुसार समय से पहले बढ़ रही गर्मी गेहूं की फसल के लिए चिंता का विषय बन सकती है। उन्होंने बताया कि जिन खेतों में अभी गेहूं की फसल में दाना विकसित हो रहा है, वहां अधिक तापमान का सीधा असर पड़ सकता है। तेज गर्मी के कारण पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और दाना पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता। जब तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है तो गेहूं के पौधों में दाने भरने की प्रक्रिया जल्दी खत्म हो जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि दाना छोटा रह जाता है और उसका वजन भी कम हो जाता है। दाने का आकार छोटा होने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है और किसानों की पैदावार कम हो सकती है। यही कारण है कि इस समय मौसम में अचानक आई गर्मी को लेकर कृषि विशेषज्ञ लगातार किसानों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो कई इलाकों में गेहूं की उपज प्रभावित हो सकती है। हालांकि जिन किसानों ने समय पर बुवाई की है और फसल की सही देखभाल की है, वहां नुकसान की संभावना थोड़ी कम हो सकती है।
किसानों के लिए विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह ?
बढ़ते तापमान के बीच कृषि विशेषज्ञ किसानों को फसल की सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने की सलाह दे रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गेहूं की फसल में सिंचाई का समय सही रखा जाए। वैज्ञानिकों का कहना है कि दिन के समय सिंचाई करने से तेज हवा और तापमान के कारण फसल को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे गेहूं की फसल में सिंचाई रात के समय करें। रात में हवा की गति कम होती है और तापमान भी अपेक्षाकृत कम रहता है। इससे खेत में पानी का बेहतर उपयोग होता है और फसल गिरने का खतरा भी कम रहता है। इसके अलावा रात में सिंचाई करने से पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है, जिससे वे गर्मी के असर को कुछ हद तक सहन कर पाते हैं।
कृषि विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि बढ़ते तापमान से फसल को बचाने के लिए गेहूं की फसल में दो प्रतिशत पोटाशियम नाइट्रेट का छिड़काव किया जा सकता है। यह छिड़काव पौधों की मजबूती बढ़ाने में मदद करता है और दाने के विकास को बेहतर बनाता है। सही समय पर किया गया यह उपाय गर्मी के प्रभाव को कम करने में सहायक साबित हो सकता है। कुल मिलाकर, हरियाणा में बढ़ती गर्मी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में इस तरह के बदलाव से खेती पर असर पड़ना स्वाभाविक है। ऐसे में जरूरी है कि किसान वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करें और फसल की नियमित निगरानी करते रहें। सही समय पर किए गए छोटे-छोटे उपाय गेहूं की फसल को गर्मी के नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

















