रेवाड़ी। बाल भवन में आयोजित जिला जन परिवाद समिति की बैठक में उस समय तीखा घटनाक्रम देखने को मिला जब धारूहेड़ा नगर पालिका के सचिव सुमित कुमार ने एनडीसी पोर्टल पर प्रॉपर्टी आईडी बनाए जाने की प्रक्रिया को लेकर खुलकर पक्ष रखा। बैठक की अध्यक्षता स्थानीय निकाय एवं राजस्व मंत्री विपुल गोयल कर रहे थे।
शिकायत नंबर सात पर सुनवाई के दौरान एनडीसी के जरिए नई प्रॉपर्टी आईडी बनाए जाने और उसके दुरुपयोग का मुद्दा उठा, जिस पर मंत्री और अधिकारी के बीच तीखी बहस हो गई। मंत्री ने कथित गलत बयानबाजी पर जेल भेजने तक की चेतावनी दी, हालांकि सचिव अपने बयान पर कायम रहे और प्रक्रिया का डेमो देने का दावा भी किया।
फरियादी राज सैनी ने आरोप लगाया कि धारूहेड़ा के नंदरामपुर बास रोड स्थित उनकी 2440 वर्ग गज व्यावसायिक जमीन की पहले से प्रॉपर्टी आईडी थी और उस पर 2010 से 2013 तक कर जमा किया गया था। इसके बावजूद उनके पति ने कथित रूप से कृषि भूमि के नाम पर एनडीसी पोर्टल के माध्यम से नई आईडी बनाकर जमीन बेच दी, जबकि पति-पत्नी का विवाद लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन है।
शिकायत पर मंत्री ने सचिव से जवाब मांगा। सचिव ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद नई आईडी डिलीट कर दी गई है और पुलिस को पत्र भेजा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीसी सिस्टम में कोई भी व्यक्ति आधार कार्ड और जमाबंदी जैसे दस्तावेज अपलोड कर स्वयं प्रॉपर्टी आईडी बना सकता है।
बैठक में मौजूद नगर परिषद के सेवानिवृत्त कार्यकारी अधिकारी मनोज यादव ने कहा कि एनडीसी केवल रजिस्ट्रेशन का दस्तावेज है और रजिस्ट्री करना या न करना तहसीलदार के विवेक पर निर्भर करता है। मंत्री ने पूरे मामले पर अगली सप्ताह चंडीगढ़ में अधिकारियों से चर्चा करने की बात कही।
बैठक में कुल 12 शिकायतें सूचीबद्ध थीं, जिनमें से छह की सुनवाई शांतिपूर्वक हुई, लेकिन सातवीं शिकायत ने पूरे सत्र का रुख बदल दिया। मामले ने एनडीसी सिस्टम की कार्यप्रणाली और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
















