हरियाणा के नारनौल में बनेगा एक ओर बडा बाइपास, जाम से मिलेगी निजात

On: January 26, 2026 8:19 PM
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हरियाणा: दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से एक नए बाईपास के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस प्रस्तावित बाईपास को लेकर सर्वेक्षण कार्य आरंभ हो चुका है, जो शहर से सटे गांवों की भूमि से होकर गुजरेगा। वर्तमान स्थिति की बात करें तो नारनौल में पहले से दो बाईपास मौजूद हैं। पहला बाईपास नई अनाज मंडी से शुरू होकर दया नगर, कोरियावास मोड़, कुलाजपुर रोड और सिघाणा रोड होते हुए महेंद्रगढ़ रोड पर नसीबपुर के पास मिलता है।

 

तीसरा बनेगा बाइपास: बता दें कि वर्तमान स्थिति की बात करें तो नारनौल में पहले से दो बाईपास मौजूद हैं। पहला बाईपास नई अनाज मंडी से शुरू होकर दया नगर, कोरियावास मोड़, कुलाजपुर रोड और सिघाणा रोड होते हुए महेंद्रगढ़ रोड पर नसीबपुर के पास मिलता है। वहीं दूसरा बाईपास गांव कांवी से शुरू होकर एनएच-148बी को एनएच-11 और एनएच-152डी से जोड़ता है। यह मार्ग कांवी से मंढाणा, सेका, कादीपुरी, नीरपुर, लहरोदा होते हुए रघुनाथपुरा गांव तक जाता है।

प्रशासन का दावा है कि यह नया बाईपास मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब को राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-11 और एनएच-152डी से सीधे जोड़ेगा, जिससे भारी वाहनों की शहर के भीतर आवाजाही कम होगी। प्रशासन की योजना दूसरे बाईपास को आगे बढ़ाकर रिंग रोड का रूप देने की है। इसके तहत नए बाईपास का प्रस्ताव तैयार किया गया है और सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जा सकती है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य लॉजिस्टिक हब की ओर जाने वाले भारी वाहनों को शहर से बाहर की ओर डायवर्ट करना है, ताकि नारनौल की मुख्य सड़कों पर लगने वाले जाम से राहत मिल सके।

प्रस्तावित बाईपास से न केवल मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब को सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग कनेक्टिविटी मिलेगी, बल्कि ढोसी पर्यटन स्थल और प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज तक पहुंच भी आसान होगी। इसके अलावा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा रघुनाथपुरा से मांदी की दिशा में सड़क को लॉजिस्टिक हब से जोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है।

लोग जता रहे है विरोध: बता दे कि इस परियोजना को लेकर किसानों में नाराज़गी देखने को मिल रही है। रघुनाथपुरा सहित आसपास के गांवों के किसानों का कहना है कि उनकी पहले ही कई एकड़ उपजाऊ भूमि हाईवे और अन्य सरकारी परियोजनाओं में अधिग्रहित हो चुकी है। अब नए बाईपास के लिए फिर से जमीन ली जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि उपजाऊ भूमि को बचाने के लिए किसी वैकल्पिक मार्ग या अन्य समाधान पर विचार किया जाए। सर्वेक्षण कार्य जारी है और किसानों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है।

Sunil Chauhan

मै पिछले दस साल से पत्रकारिता में कार्यरत हूं। जल्दी से जल्दी देश की की ताजा खबरे को आम जनता तक पहुंचाने के साथ समस्याओं को उजाकर करना है।

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