Haryana: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 21 साल पुरानी लंबित न्यायिक लड़ाई को समाप्त करते हुए शक्ति सिंह, कुलदीप मलिक, सुभाष तायाल और दीपक कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया। ये अधिकारी 21 वर्ष पूर्व हरियाणा सिविल सर्विसेज़ (कार्यकारी शाखा) के लिए चयनित हुए थे, लेकिन नियुक्ति से वंचित रह गए थे। उच्च न्यायालय ने उनके नियुक्ति से इनकार के सभी आधारों को अमान्य घोषित कर दिया।
न्यायालय का यह निर्णय शक्ति सिंह, कुलदीप मलिक, दीपक कुमार और सुभाष तायाल की नियुक्तियों का रास्ता साफ करता है। इन्हें नाममात्र वरिष्ठता और उससे जुड़ी सभी सेवा सुविधाएं प्राप्त होंगी। इससे पहले पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सुरेंद्र लठार के पक्ष में फैसला सुनाया था, जो इसी चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्त होने वाले एक उम्मीदवार थे।
चयन और नियुक्ति में हुई देरी
शक्ति सिंह और अन्य HCS अधिकारियों ने हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित HCS (कार्यकारी शाखा) परीक्षा में भाग लिया और आयोग द्वारा उन्हें चयनित कर नियुक्ति की सिफारिश की गई थी। यह प्रक्रिया 2004 विधानसभा चुनाव के दौरान मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के प्रभाव के कारण रुकी रही। उसके बाद सरकार बदलने पर मामला राज्य सतर्कता ब्यूरो के पास भेजा गया, जिससे और विलंब हुआ। शक्ति सिंह और अन्य उम्मीदवारों ने उस समय के मुख्य सचिव के खिलाफ उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल की। न्यायालय के निर्देश पर सतर्कता ब्यूरो ने 9 नवंबर, 2011 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कुछ अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। इसी आधार पर राज्य ने फिर से उम्मीदवारों की नियुक्ति रोकी।
जांच में दोष सिद्ध न होने पर मार्ग खुला
बाद में यह स्पष्ट हुआ कि कथित अनियमितताएं पहले ही फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, करनाल की 18 जुलाई, 2011 की जांच रिपोर्ट में साफ कर दी गई थीं। इसके बाद उम्मीदवारों ने पुनः उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने लंबी सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि हरियाणा लोक सेवा आयोग ने कभी भी किसी नियम उल्लंघन के आधार पर चयनकर्ताओं की नियुक्ति को चुनौती नहीं दी।
इसके अलावा, उसी चयन प्रक्रिया के तहत लगभग 28 अन्य उम्मीदवारों को पहले ही नियुक्त किया जा चुका था। यह निर्णय चारों अधिकारियों, जिनमें शक्ति सिंह भी शामिल हैं, को HCS (कार्यकारी शाखा) में नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
शक्ति सिंह का वर्तमान कार्य और योगदान
शक्ति सिंह 2004 से हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में कार्यरत हैं और वर्तमान में क्षेत्रीय अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। न्यायालय के निर्णय के बाद अब उन्हें नाममात्र वरिष्ठता और सेवा सुविधाओं के साथ औपचारिक नियुक्ति मिलेगी। इससे न केवल उनके करियर में न्याय हुआ है, बल्कि हरियाणा लोक सेवा आयोग की चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी स्थापित हुई है।
यह फैसला लंबे समय से चली आ रही न्यायिक लड़ाई का अंत करता है और चयनित उम्मीदवारों के अधिकारों की पुष्टि करता है। अब राज्य सरकार को चारों अधिकारियों की नियुक्ति के साथ सभी सेवा लाभ प्रदान करने होंगे।

















