Haryana News: हिसार के गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJU) के एक शिक्षक ने ऐसा अनोखा उपकरण तैयार किया है जो वाहन चालक के झपकी लेने पर दुर्घटना होने से पहले ही वाहन को रोक देगा। यह डिवाइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित है जो सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर और ट्रैफिक इंटिग्रेशन सेंटर के विशेषज्ञ डॉ. नवदीप मोर ने इस डिवाइस को तैयार किया है। इसे वाहन के स्टीयरिंग के पास लगाया जाता है। इसमें लगे तीन सेंसर लगातार चालक के चेहरे के भाव और आंखों की गतिविधियों की निगरानी करते हैं। जैसे ही यह सेंसर पहचानते हैं कि चालक को नींद आ रही है या ध्यान भटक रहा है तो तुरंत अलार्म बजता है। अगर चालक फिर भी प्रतिक्रिया नहीं देता तो वाहन की गति अपने आप धीमी होकर ब्रेक लग जाती है और वाहन सुरक्षित तरीके से रुक जाता है।
इस तकनीक को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से पेटेंट भी मिल चुका है। डॉ. मोर का कहना है कि उनका उद्देश्य सड़कों पर होने वाले झपकीजनित हादसों को कम करना है। यह डिवाइस वाहन की गति, स्टीयरिंग के मूवमेंट और चालक के चेहरे की थकान के संकेतों का संयुक्त विश्लेषण करता है। इससे सिस्टम यह तय कर लेता है कि चालक कितनी सतर्कता से वाहन चला रहा है।
हर साल देश में हजारों लोगों की मौत सिर्फ चालक के झपकी लेने के कारण होती है। हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुई एक दुर्घटना में छह लोगों की जान चली गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आने वाले समय में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति साबित हो सकती है। इससे न केवल जान-माल की हानि रुकेगी बल्कि लंबी दूरी के ड्राइवरों के लिए यह एक सुरक्षात्मक कवच का काम करेगी।
डॉ. मोर के अनुसार यह उपकरण बेहद किफायती है और इसे बस, ट्रक या निजी वाहनों में आसानी से लगाया जा सकता है। इससे सड़क पर ट्रैफिक अनुशासन में सुधार आएगा और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नरेश राम गुप्ता ने डॉ. मोर को सम्मानित करते हुए कहा कि यह आविष्कार न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। यह तकनीक भारत को स्मार्ट और सुरक्षित यातायात की दिशा में एक कदम आगे ले जाएगी।
















