हरियाणा की तहसीलों में भ्रष्टाचार का जाल इस कदर फैला हुआ है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिक जांच तक ही सीमित रह गया है। सूत्रों के अनुसार, अकेले एक जिले में रोजाना 50 से ज्यादा अवैध कालोनियों की रजिस्ट्री की जा रही है। इन रजिस्ट्री में न तो नियमों का पालन किया जा रहा है और न ही सरकार के बनाए गए मानकों का ध्यान रखा जा रहा है।Haryana crime
जानकारी के मुताबिक, अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री करवाने के लिए चपरासी से लेकर पटवारी, तहसीलदार और यहां तक कि उपायुक्त स्तर तक मिलीभगत का खेल चल रहा है। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि आम लोगों को भी ठगा जा रहा है।Haryana crime
लोग लाखों रुपये खर्च कर जमीन खरीद रहे हैं, जबकि ये कॉलोनियां कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त ही नहीं हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें दर्ज करवाने के बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।Haryana crime
मामले की जांच शुरू तो होती है, लेकिन महीनों तक फाइलें दबी रहती हैं और अंत में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इससे भ्रष्टाचार करने वालों के हौसले और भी बुलंद हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते सरकार ने सख्त कदम नहीं उठाए तो आने वाले वर्षों में अवैध कालोनियों का जाल और गहराता जाएगा।
पैसे देकर मिल जाती है एनओसी: जमीन भले ही अवैध हो, यहां दलालो की सेटिंग से पैसे देकर एनओसी मिल जाती है। सबसे अहम बात यह है एनओसी के नाम डीटीपी भी दलालों के माध्यम से मोटी कमाई कर रहा है।
अगर धारूहेड़ा की बात करें तो पिछले दो साल में फर्जी रजिस्ट्री को लेकर चार केस दर्ज हो चुके है लेकिन आज रजिस्ट्री करने वाले नायब पर कोई आंच नहीं आई है। क्यों कि जब पूरा प्रशासन की मिलीभगत हो तो फिर कार्रवाई कौन करेगाHaryana crime
अजीब खेल: गलत रजिस्ट्री को लेकर अगर जांच होती है सिर्फ 200 रूपए लेने वाले नंबरदार को जरूर सजा होगी, लेकिन दो दो लाख लेने वाले तहसीलदार की नौकरी पर कोई आंच नही आती है। इतनी सरकार आई लेकिन हर साल ये खेल खत्म नही हो रहा है।

















