IAS Success Story: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के छोटे से गांव खलीलपुर से निकला एक होनहार युवा आज पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। बात हो रही है प्रशांत सिंह की, जिन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 102वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार का सपना पूरा किया, बल्कि पूरे जिले का नाम भी रोशन कर दिया।
पिता का सपना, बेटे ने किया साकार IAS Success Story
प्रशांत सिंह के पिता सुशील सिंह, जो इस समय लखनऊ में डीसी मनरेगा के पद पर कार्यरत हैं, कभी खुद भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना चाहते थे। परिस्थितियों के चलते उनका यह सपना अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को उस दिशा में बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया। प्रशांत ने पिता के अधूरे सपनों को अपना लक्ष्य बनाया और आखिरकार उसे सच कर दिखाया।
शिक्षा और संघर्ष का सफर IAS Success Story
प्रशांत की प्रारंभिक पढ़ाई लखनऊ में हुई, इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा में उन्होंने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन प्रशांत ने अपनी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर मंज़िल पाई।
माता-पिता की अहम भूमिका IAS Success Story
प्रशांत की सफलता में उनके माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। पिता ने जहां उन्हें प्रशासनिक सेवाओं की ओर प्रेरित किया, वहीं मां ने हर मोड़ पर उनका मनोबल बढ़ाया और भावनात्मक रूप से उन्हें मजबूत बनाए रखा। प्रशांत के अनुसार, “मेरे माता-पिता ने मुझे कभी हार मानने नहीं दी। उनका विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत बना।”
गांव और जिले में खुशी की लहर IAS Success Story
रिजल्ट आते ही जौनपुर जिले के खलीलपुर गांव में जश्न का माहौल बन गया। हर कोई प्रशांत की सफलता की सराहना कर रहा है। गांव के लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया और मिठाइयां बांटी गईं। यह सफलता सिर्फ एक युवा की नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
प्रशांत सिंह आज जौनपुर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों और लक्ष्य पर नजर टिकी हो, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती। प्रशांत का कहना है, “हर असफलता एक सीख होती है। यदि आप लगातार मेहनत करते रहें, तो सफलता जरूर मिलेगी।”















