Cow Farming: भारत में डेयरी व्यवसाय (dairy business) तेजी से बढ़ रहा है और किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनता जा रहा है। लेकिन जब बात कम लागत में उच्च दूध उत्पादन (milk production) की आती है तो थारपारकर गाय सबसे बेहतर नस्लों में से एक मानी जाती है। यह विशेष नस्ल मूल रूप से राजस्थान और पाकिस्तान के थार क्षेत्र से आती है लेकिन इसे कर्नाटक सहित देश के कई हिस्सों में सफलतापूर्वक पाला जा रहा है। इसकी खासियत यह है कि यह कम रख-रखाव में भी अच्छी मात्रा में दूध देती है और कठिन जलवायु में भी आराम से जीवित रह सकती है।
थारपारकर गाय अपने गर्म और शुष्क जलवायु सहनशीलता (climate tolerance) के लिए प्रसिद्ध है। यह गाय न केवल गर्मी बल्कि ठंड को भी सहन कर सकती है जिससे यह हर तरह के मौसम में एक बेहतर विकल्प बनती है। अन्य गायों की तुलना में इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (disease resistance) अधिक होती है जिससे इसे पालने में पशुपालकों को अतिरिक्त देखभाल करने की जरूरत नहीं पड़ती। यही कारण है कि छोटे और मध्यम स्तर के डेयरी किसान (dairy farmers) इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
थारपारकर गाय का दूध उत्पादन
एक थारपारकर गाय प्रतिदिन लगभग 10 से 15 लीटर दूध दे सकती है जो कि कई अन्य देसी नस्लों की तुलना में काफी अच्छा उत्पादन है। इसके दूध में वसा (fat content) की मात्रा लगभग 5% होती ह जिससे यह पोषण से भरपूर और गाढ़ा होता है। यही कारण है कि थारपारकर गाय का दूध भारतीय परिवारों में खासतौर पर पसंद किया जाता है और इसे घी, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पादों के लिए बेहतरीन माना जाता है।
इस नस्ल की गायें अपने जीवनकाल में कई बार बच्चों को जन्म देती हैं जिससे उनका कुल दूध उत्पादन (total milk yield) 1400 से 1600 लीटर तक पहुंच सकता है। जब कोई किसान इस गाय को पालता है तो उसे लंबे समय तक इसका लाभ मिलता है क्योंकि इसकी उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है। यह इसे व्यावसायिक डेयरी फार्म (commercial dairy farm) के लिए भी उपयुक्त बनाता है।
कम रखरखाव वाली गाय
थारपारकर गाय की प्रजनन क्षमता (breeding capability) भी उल्लेखनीय होती है। यह नस्ल अपने जीवनकाल में लगभग 15 बार बच्चे दे सकती है जिससे यह पशुपालकों के लिए लाभदायक साबित होती है। अधिक प्रजनन दर (high fertility rate) होने के कारण किसान एक गाय से कई पीढ़ियों तक फायदा उठा सकते हैं। इसके बछड़े भी मजबूत और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतरीन होते हैं जिनका उपयोग आगे डेयरी फार्मिंग या खेती के अन्य कार्यों में किया जा सकता है।
इस नस्ल की एक और खास बात यह है कि इसे ज्यादा महंगे खान-पान (feeding cost) की जरूरत नहीं होती। यह आसानी से उपलब्ध चारा और सूखा चारा खाकर भी अच्छा दूध उत्पादन कर सकती है। अगर किसान इसे हरे चारे और संतुलित आहार (balanced diet) के साथ पालें तो यह और भी अधिक दूध दे सकती है। इसके रख-रखाव पर कम खर्च आता है जिससे यह गरीब और मध्यम वर्ग के किसानों के लिए भी एक किफायती विकल्प (cost-effective option) बनती है।
थारपारकर गाय का स्वास्थ्य
इस गाय की रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity power) काफी अच्छी होती है। यह आमतौर पर बीमारियों से जल्दी प्रभावित नहीं होती जिससे पशुपालकों को अतिरिक्त दवाओं और इलाज पर अधिक खर्च नहीं करना पड़ता। इसके अलावा यह गाय विषम परिस्थितियों में भी अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने में सक्षम होती है। कई अन्य नस्लों की तुलना में इसे विशेष टीकाकरण (vaccination) की कम जरूरत पड़ती है।
इसके मजबूत शरीर और सहनशीलता के कारण यह गाय भारत के विभिन्न हिस्सों में आसानी से पाली जा सकती है। चाहे राजस्थान के रेगिस्तान हों या दक्षिण भारत की आर्द्र जलवायु, यह हर जगह अच्छा प्रदर्शन करती है। यही कारण है कि कई राज्यों में पशुपालन विभाग (animal husbandry department) भी किसानों को थारपारकर नस्ल की गाय पालने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

किसानों के लिए मुनाफ़े का सौदा
अगर कोई किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाना चाहता है तो थारपारकर गाय सबसे बेहतर विकल्प बन सकती है। यह ना केवल उच्च दूध उत्पादन देती है बल्कि इसके रखरखाव पर भी ज्यादा खर्च नहीं होता। इसके अलावा, इसकी लंबी उम्र और अधिक प्रजनन दर इसे डेयरी व्यवसाय के लिए और भी लाभदायक बनाती है।
भारत में डेयरी उद्योग (dairy industry) लगातार बढ़ रहा है और सरकार भी पशुपालकों को विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता प्रदान कर रही है। अगर कोई किसान डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहता है तो थारपारकर गाय एक बेहतरीन निवेश साबित हो सकती है। इसकी उच्च उत्पादकता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और कम लागत में रखरखाव इसे डेयरी क्षेत्र में सफल बनाने के लिए महत्वपूर्ण कारक बनाते हैं।

















