Haryana में बिजली दरों को लेकर बड़ा फैसला आज यानी बुधवार को लिया जाएगा। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने राज्य सलाहकार समिति (SAC) की बैठक बुलाई है। इस बैठक में बिजली दरों और राजस्व घाटे को लेकर चर्चा होगी, जिसके बाद सरकार कोई अहम निर्णय ले सकती है। राज्य में नगर निकाय चुनावों के बीच इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2019 के बाद नहीं बढ़ी बिजली दरें, घाटे का हवाला दे रही कंपनियां
हरियाणा में पिछले पांच सालों से बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। साल 2019 के बाद से राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला, लेकिन अब बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) घाटे का हवाला देते हुए दरें बढ़ाने की मांग कर रही हैं।
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (UHBVNL) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (DHBVNL) ने आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 4520 करोड़ रुपये की राजस्व आवश्यकता (ARR) की मांग की है। इन कंपनियों का दावा है कि मौजूदा बिजली दरों से उनका खर्च पूरा नहीं हो रहा, जिससे उन्हें घाटे का सामना करना पड़ रहा है।
बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
HERC द्वारा बुलाई गई इस बैठक में मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी—
- बिजली दरों में वृद्धि: कंपनियों की मांग को देखते हुए दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया जा सकता है।
- राजस्व घाटे को पूरा करने के उपाय: घाटे को कम करने के लिए सरकार किसी वैकल्पिक योजना पर विचार कर सकती है।
- उपभोक्ताओं पर प्रभाव: यदि दरें बढ़ती हैं, तो इसका असर आम जनता और उद्योगों पर कैसा पड़ेगा, इस पर भी विचार किया जाएगा।
हरियाणा में बिजली की स्थिति और सरकार की रणनीति
हरियाणा सरकार ने राज्य में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डालना चाहती, लेकिन बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति को भी संतुलित करना जरूरी है।
वर्तमान में हरियाणा में घरेलू उपभोक्ताओं को औसतन 4.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। यदि दरों में बढ़ोतरी होती है, तो यह 10-15% तक हो सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय बैठक के बाद ही लिया जाएगा।
उद्योगों और आम जनता की प्रतिक्रिया
बिजली दरों में संभावित वृद्धि को लेकर उद्योगपति और आम जनता चिंता जता रहे हैं। छोटे उद्योगों का कहना है कि पहले ही उत्पादन लागत बढ़ रही है, ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि होने से व्यापार प्रभावित हो सकता है। वहीं, आम नागरिकों का कहना है कि महंगाई पहले से ही बढ़ रही है और यदि बिजली महंगी हुई तो घरेलू खर्च और बढ़ जाएगा।
रोहतक के एक व्यापारी मनोज शर्मा ने कहा, “हम पहले ही महंगे बिजली बिल का भुगतान कर रहे हैं। अगर दरें और बढ़ीं, तो हमें नुकसान उठाना पड़ेगा। सरकार को इस पर दोबारा विचार करना चाहिए।”
वहीं, गुरुग्राम की एक गृहिणी किरण वर्मा ने कहा, “गैस, पेट्रोल और खाने-पीने की चीजें पहले ही महंगी हो रही हैं। अब अगर बिजली भी महंगी हो गई, तो आम आदमी कैसे गुजारा करेगा?”
क्या कहता है बिजली विभाग?
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार कोशिश कर रही है कि उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ न पड़े। हरियाणा बिजली विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमने अपने प्रस्ताव में दरों में अधिकतम 10% तक की बढ़ोतरी का सुझाव दिया है। सरकार जनता के हित को ध्यान में रखकर ही फैसला लेगी।”
क्या हो सकता है फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार बिजली कंपनियों के घाटे को देखते हुए मामूली दर वृद्धि को मंजूरी दे सकती है। हालांकि, सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि दरें इतनी न बढ़ें कि उपभोक्ताओं को भारी नुकसान उठाना पड़े।
सरकार कुछ और विकल्पों पर भी विचार कर सकती है, जैसे—
- सरकारी सब्सिडी: सरकार बिजली कंपनियों को घाटा पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता दे सकती है।
- स्लैब आधारित बढ़ोतरी: छोटे उपभोक्ताओं के लिए दरें कम रखी जाएं और बड़े उपभोक्ताओं के लिए थोड़ी अधिक बढ़ोतरी की जाए।
- वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर जोर: सौर ऊर्जा और अन्य स्रोतों से बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया जा सकता है।
हरियाणा में बिजली दरों को लेकर आज अहम फैसला लिया जाएगा। यदि दरें बढ़ती हैं, तो आम जनता और उद्योगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा। हालांकि, सरकार उपभोक्ताओं और कंपनियों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करेगी। अब देखना होगा कि इस बैठक में क्या निर्णय लिया जाता है और इसका प्रदेश के लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

















